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Study Notes

UPTET Hindi Sahitya Notes & Authors: Complete Study Material | यूपीटेट हिंदी साहित्य नोट्स और लेखक: संपूर्ण अध्ययन सामग्री

UPTET Hindi Sahitya Notes & Authors: Master Hindi Literature for UPTET 2026 | यूपीटेट हिंदी साहित्य नोट्स और प्रमुख लेखक: 2026 परीक्षा के लिए हिंदी साहित्य में महारत हासिल करें

Practice Questions
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Unictest Team

Updated: 2026-04-20 · English

UPTET Hindi Sahitya Notes & Authors: Complete Study Material | यूपीटेट हिंदी साहित्य नोट्स और लेखक: संपूर्ण अध्ययन सामग्री

यूपीटेट (UPTET) परीक्षा में हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya) का खंड एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जो भाषा शिक्षक बनना चाहते हैं। इस खंड में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए हिंदी साहित्य के विभिन्न कालों, प्रमुख कवियों, लेखकों और उनकी रचनाओं की गहन जानकारी होना आवश्यक है। Unictest आपके लिए UPTET Hindi Sahitya Notes & Authors का विस्तृत और संपूर्ण अध्ययन सामग्री लेकर आया है, जो आपकी तैयारी को नई दिशा देगा।


The Hindi Sahitya section in the UPTET (Uttar Pradesh Teacher Eligibility Test) plays a crucial role, especially for candidates aspiring to become language teachers. To score well in this section, a deep understanding of the different periods (कालों) of Hindi literature, prominent poets, authors, and their works is essential. Unictest brings you comprehensive and detailed UPTET Hindi Sahitya Notes & Authors study material designed to guide your preparation effectively.


हिंदी साहित्य का काल विभाजन (Periods of Hindi Literature)

हिंदी साहित्य का इतिहास अत्यंत समृद्ध और विशाल है। अध्ययन की सुविधा के लिए इसे मुख्य रूप से चार कालों में विभाजित किया गया है। इन कालों की विशेषताओं और प्रमुख रचनाकारों को समझना UPTET परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


  • 1. आदिकाल (वीरगाथा काल): यह हिंदी साहित्य का प्रारंभिक काल है, जिसकी अवधि लगभग 1050 ई. से 1375 ई. तक मानी जाती है। इसमें वीर रस प्रधान रचनाएँ मिलती हैं।
  • 2. भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल): 1375 ई. से 1700 ई. तक का यह काल हिंदी साहित्य का 'स्वर्ण युग' कहलाता है। इसमें भक्ति भावना से ओतप्रोत रचनाएँ प्रमुख थीं। इसे सगुण और निर्गुण भक्तिधारा में बांटा गया है।
  • 3. रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल): 1700 ई. से 1850 ई. तक के इस काल में श्रृंगार रस की प्रधानता रही। कवि दरबारों से जुड़े थे और लक्षण ग्रंथों की रचना हुई।
  • 4. आधुनिक काल: 1850 ई. से अब तक का काल आधुनिक काल कहलाता है। इसमें गद्य साहित्य का विकास हुआ और विभिन्न विधाएँ (कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध) सामने आईं। इसे भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता आदि उप-कालों में बांटा गया है।

Note: UPTET परीक्षा में इन चारों कालों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। आपको प्रत्येक काल की प्रमुख विशेषताएँ, मुख्य कवि/लेखक और उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ याद रखनी होंगी।

यूपीटेट के लिए महत्वपूर्ण लेखक और उनकी रचनाएँ (Important Authors and Their Works for UPTET)

UPTET Hindi Sahitya खंड में प्रमुख लेखकों और उनकी रचनाओं पर आधारित सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। आपको इन पर विशेष ध्यान देना होगा। इसमें केवल साहित्यकार का नाम ही नहीं, बल्कि उनकी प्रमुख कृतियों, विधा (कहानी, उपन्यास, नाटक आदि) और कभी-कभी उनके उपनाम या उपाधियों के बारे में भी पूछा जा सकता है।


For the UPTET Hindi Sahitya section, direct questions are asked based on prominent authors and their works. You need to pay special attention to these. This includes not just the name of the author, but also their major works, genre (story, novel, play, etc.), and sometimes even their pseudonyms or titles.


उदाहरण के लिए, भक्तिकाल में कबीरदास, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई जैसे कवियों की रचनाएँ; रीतिकाल में केशवदास, बिहारी, मतिराम; और आधुनिक काल में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह 'दिनकर' जैसे दिग्गजों की कृतियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन सभी की विस्तृत जानकारी और उनके योगदान को समझना आपकी सफलता के लिए कुंजी है।

Important Topics Data

काल (Period)अवधि (Approximate Period)प्रमुख विशेषताएँ (Main Characteristics)प्रमुख कवि/लेखक (Prominent Poets/Authors)
आदिकाल (वीरगाथा काल)1050 - 1375 ई.वीर रस की प्रधानता, प्रशस्तिपरक रचनाएँचंदबरदाई, नरपति नाल्ह, दलपति विजय
भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल)1375 - 1700 ई.भक्ति भावना, धार्मिकता, लोक कल्याणकबीरदास, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई
रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल)1700 - 1850 ई.श्रृंगार रस, लक्षण ग्रंथ, दरबार आश्रयकेशवदास, बिहारी, मतिराम, घनानंद
आधुनिक काल1850 ई. से अब तकगद्य का विकास, विविध विधाएँ, राष्ट्रीय चेतनाभारतेन्दु हरिश्चंद्र, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, निराला
छायावाद (आधुनिक काल का उप-काल)1918 - 1936 ई.रहस्यवाद, प्रकृति प्रेम, वैयक्तिकताप्रसाद, पंत, निराला, महादेवी वर्मा

Detailed Notes

आधुनिक काल के प्रमुख उप-काल और रचनाकार (Major Sub-periods and Authors of Modern Period)

आधुनिक काल हिंदी साहित्य का सबसे विस्तृत और विविध काल है, जिससे UPTET में सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसे कई उप-कालों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट साहित्यिक प्रवृत्तियाँ और प्रमुख रचनाकार हैं।


  • भारतेन्दु युग (1850-1900 ई.): आधुनिक हिंदी गद्य का प्रवर्तक काल। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, प्रताप नारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट प्रमुख हैं।
  • द्विवेदी युग (1900-1918 ई.): महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर। खड़ी बोली का परिष्कार और विकास। मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' प्रमुख।
  • छायावाद (1918-1936 ई.): रहस्यवाद, प्रकृति प्रेम, वैयक्तिकता। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा 'छायावाद के चार स्तंभ' माने जाते हैं।
  • प्रगतिवाद (1936-1943 ई.): मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित। सामाजिक यथार्थ और शोषित वर्ग का चित्रण। नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल, शिवमंगल सिंह 'सुमन'।
  • प्रयोगवाद (1943-1950 ई.): नए प्रयोग, नई शैलियाँ। अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन), मुक्तिबोध।
  • नई कविता (1950 ई. के बाद): लघु मानव की प्रतिष्ठा, शहरी जीवन का यथार्थ। धर्मवीर भारती, रघुवीर सहाय।

गद्य और पद्य की प्रमुख विधाएँ (Major Genres of Prose and Poetry)

UPTET Hindi Sahitya में केवल लेखकों और रचनाओं से ही नहीं, बल्कि विभिन्न साहित्यिक विधाओं से भी प्रश्न आते हैं। आपको यह पहचानना आना चाहिए कि कौन सी रचना किस विधा (जैसे - कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा, एकांकी, यात्रा वृत्तांत आदि) के अंतर्गत आती है।


In UPTET Hindi Sahitya, questions are asked not only about authors and works but also about different literary genres. You should be able to identify which work falls under which genre (e.g., story, novel, drama, essay, memoir, biography, autobiography, one-act play, travelogue, etc.).


  • उपन्यास: प्रेमचंद (गोदान, गबन), फणीश्वरनाथ रेणु (मैला आँचल), जैनेंद्र (त्यागपत्र)।
  • कहानी: प्रेमचंद (कफन, पूस की रात), जयशंकर प्रसाद (गुंडा, आकाशदीप), मन्नू भंडारी (यही सच है)।
  • नाटक: जयशंकर प्रसाद (चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त), मोहन राकेश (आषाढ़ का एक दिन)।
  • निबंध: आचार्य रामचंद्र शुक्ल (चिंतामणि), हजारी प्रसाद द्विवेदी (अशोक के फूल)।
  • आत्मकथा/जीवनी: हरिवंश राय बच्चन (क्या भूलूं क्या याद करूं - आत्मकथा), अमृतराय (प्रेमचंद: कलम का सिपाही - जीवनी)।

Tip: प्रमुख रचनाकारों की कम से कम 2-3 महत्वपूर्ण रचनाएँ और उनकी विधा याद रखें। इससे आप परीक्षा में कई प्रश्नों को आसानी से हल कर पाएंगे।

Important Questions & Tips

UPTET हिंदी साहित्य की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियाँ (Preparation Strategies for UPTET Hindi Sahitya)

हिंदी साहित्य एक ऐसा खंड है जहाँ आप अपनी समझ और याददाश्त के दम पर पूरे अंक प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ कुछ प्रभावी रणनीतियाँ दी गई हैं:


  • कालक्रमानुसार अध्ययन: हिंदी साहित्य को उसके काल विभाजन के अनुसार पढ़ें। प्रत्येक काल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ, कवि, लेखक और उनकी रचनाएँ एक क्रम में याद करें।
  • महत्वपूर्ण लेखकों पर ध्यान: जिन लेखकों से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं (जैसे प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी वर्मा, तुलसीदास, सूरदास), उनकी जीवनी, प्रमुख रचनाएँ, साहित्यिक योगदान और उपाधियाँ विशेष रूप से पढ़ें।
  • शॉर्ट नोट्स बनाएँ: हर काल और प्रमुख लेखक के लिए संक्षिप्त नोट्स बनाएँ। इसमें लेखक का नाम, उनकी 2-3 प्रसिद्ध रचनाएँ और उनकी विधा शामिल हो।
  • पुनरावृत्ति (Revision): नियमित पुनरावृत्ति सफलता की कुंजी है। जो कुछ भी आप पढ़ते हैं, उसका समय-समय पर दोहराव करते रहें, खासकर रचनाओं और उनके लेखकों का।
  • पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें: UPTET के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों (Previous Year Papers) को हल करने से आपको प्रश्नों के पैटर्न और महत्वपूर्ण विषयों का अंदाजा मिलेगा।
  • क्विज़ और मॉक टेस्ट: Unictest पर उपलब्ध क्विज़ और मॉक टेस्ट का अभ्यास करें। यह आपकी गति और सटीकता में सुधार करेगा।

चेतावनी: केवल रटने पर निर्भर न रहें। रचनाओं के पीछे की भावना और साहित्यकारों के योगदान को समझने का प्रयास करें। इससे आपको लंबे समय तक जानकारी याद रखने में मदद मिलेगी।

UPTET हिंदी साहित्य के लिए सुझाए गए संसाधन (Recommended Resources for UPTET Hindi Sahitya)

आपकी तैयारी को और मजबूत बनाने के लिए, कुछ मानक पुस्तकें और ऑनलाइन संसाधन सहायक हो सकते हैं:


  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल का 'हिंदी साहित्य का इतिहास': यह एक संदर्भ ग्रंथ है, लेकिन इसके सारांश को समझना महत्वपूर्ण है।
  • डॉ. हरदेव बाहरी या पृथ्वीनाथ पाण्डेय की हिंदी व्याकरण एवं साहित्य की पुस्तकें: ये पुस्तकें UPTET के लिए पर्याप्त सामग्री प्रदान करती हैं।
  • Unictest के ऑनलाइन नोट्स और अभ्यास सेट: हमारे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध विशेष रूप से तैयार किए गए नोट्स और प्रैक्टिस सेट आपकी तैयारी को धार देंगे।

UPTET परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए हिंदी साहित्य एक स्कोरिंग खंड हो सकता है यदि आपकी तैयारी सही दिशा में हो। Unictest के साथ जुड़कर अपनी तैयारी को मजबूत करें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करें!

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Frequently Asked Questions (UPTET)

यूपीटेट परीक्षा में हिंदी साहित्य का खंड अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जो प्राथमिक या उच्च प्राथमिक स्तर पर हिंदी शिक्षक बनना चाहते हैं। यह खंड कुल हिंदी भाषा के अंकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसमें अच्छे अंक प्राप्त करके आप अपनी मेरिट बढ़ा सकते हैं।

यूपीटेट हिंदी साहित्य के लिए मुख्य रूप से आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल, चारों ही महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, आधुनिक काल (विशेषकर भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग और छायावाद) से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। भक्तिकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

लेखकों और रचनाओं को याद रखने के लिए कालक्रमानुसार अध्ययन करें। प्रमुख लेखकों के नोट्स बनाएँ जिनमें उनकी 2-3 प्रसिद्ध रचनाएँ और उनकी विधा शामिल हो। बार-बार पुनरावृत्ति करें, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें और ऑनलाइन क्विज़ का अभ्यास करें। निमोनिक्स और कहानियों के माध्यम से भी याद करना सहायक हो सकता है।

यूपीटेट हिंदी साहित्य की तैयारी के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल का 'हिंदी साहित्य का इतिहास' (संक्षिप्त रूप में), डॉ. हरदेव बाहरी या पृथ्वीनाथ पाण्डेय की हिंदी व्याकरण एवं साहित्य की पुस्तकें सहायक हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, Unictest के विशेष रूप से तैयार किए गए नोट्स और अभ्यास सेट भी आपकी तैयारी को मजबूत करेंगे।

यूपीटेट हिंदी साहित्य में मुख्य रूप से लेखक और उनकी रचनाएँ, रचनाओं की विधा (जैसे - कहानी, उपन्यास, नाटक), विभिन्न कालों की प्रमुख विशेषताएँ, कवियों और लेखकों के उपनाम/उपाधियाँ, और प्रसिद्ध पंक्तियाँ या कथन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। व्याकरण और अपठित गद्यांश भी इस खंड का हिस्सा होते हैं।

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