पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक समझौते: क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता (Global Agreements for Environmental Protection: Kyoto Protocol and Paris Agreement)
Practice QuestionsUnictest Team
Updated: 2026-04-20 · English
यूपीटीईटी (UPTET) परीक्षा के पर्यावरण अध्ययन (EVS) खंड में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय समझौते एक महत्वपूर्ण विषय हैं। इनमें क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता सबसे प्रमुख हैं। ये दोनों समझौते वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Global Climate Change) को संबोधित करने और ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इस लेख में, हम इन महत्वपूर्ण समझौतों की गहराई से चर्चा करेंगे, जो आपको UPTET 2026 परीक्षा के लिए तैयारी करने में मदद करेगा।
क्योटो प्रोटोकॉल, संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके ग्लोबल वार्मिंग का मुकाबला करना है। इसे जापान के क्योटो शहर में 11 दिसंबर 1997 को अपनाया गया था और यह 16 फरवरी 2005 को लागू हुआ। यह प्रोटोकॉल उन औद्योगिक देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्य निर्धारित करता है जिन्हें 'एनेक्स I' देश कहा जाता है।
क्योटो प्रोटोकॉल पहला और एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता था जिसने कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्य निर्धारित किए। इसने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक समस्या को संबोधित करने के लिए एक ढांचा प्रदान किया और भविष्य के समझौतों, जैसे पेरिस समझौते, के लिए आधार तैयार किया। हालांकि इसकी प्रभावशीलता पर बहस हुई, इसने वैश्विक जलवायु कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व किया। भारत ने 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल की पुष्टि की थी, लेकिन विकासशील देश होने के कारण उस पर कोई बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्य नहीं थे। भारत ने CDM परियोजनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे देश में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा मिला।
| विशेषता (Feature) | क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) | पेरिस समझौता (Paris Agreement) |
|---|---|---|
| वर्ष (Year) | 1997 (अपनाया गया), 2005 (लागू) | 2015 (अपनाया गया), 2016 (लागू) |
| प्रकृति (Nature) | विकसित देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य | सार्वभौमिक रूप से कानूनी रूप से बाध्यकारी (NDCs की प्रक्रिया) |
| दृष्टिकोण (Approach) | टॉप-डाउन (Top-Down): UNFCCC द्वारा लक्ष्य निर्धारित | बॉटम-अप (Bottom-Up): देश अपने NDCs स्वयं निर्धारित करते हैं |
| भागीदारी (Participation) | मुख्यतः विकसित देश (एनेक्स I) | सभी देश (विकसित और विकासशील) |
| मुख्य लक्ष्य (Main Goal) | GHG उत्सर्जन में कमी (विशिष्ट लक्ष्य) | वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से नीचे (1.5°C का लक्ष्य) |
| अवधि (Duration) | प्रतिबद्धता अवधि (2008-2012, 2013-2020) | दीर्घकालिक, NDCs हर 5 साल में अपडेट होते हैं |
| प्रमुख तंत्र (Key Mechanisms) | CDM, JI, उत्सर्जन व्यापार | NDCs, वैश्विक स्टॉकटेक, अनुकूलन, वित्त |
पेरिस समझौता एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है जो जलवायु परिवर्तन पर आधारित है। इसे 12 दिसंबर 2015 को पेरिस, फ्रांस में UNFCCC के पक्षकारों के 21वें सम्मेलन (COP21) में 196 पक्षों द्वारा अपनाया गया था और यह 4 नवंबर 2016 को लागू हुआ। क्योटो प्रोटोकॉल के विपरीत, पेरिस समझौता एक सार्वभौमिक समझौता है जिसमें सभी देशों को अपने उत्सर्जन को कम करने के लिए योगदान देना होता है।
UPTET परीक्षा में पर्यावरण अध्ययन खंड में क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इन विषयों की तैयारी के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें:
दोनों समझौते जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन उनके दृष्टिकोण और संरचना में महत्वपूर्ण अंतर हैं। UPTET EVS के लिए इन अंतरों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। भारत ने क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर और पुष्टि की थी, और उसने स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) के तहत कई परियोजनाओं को लागू किया। पेरिस समझौते के तहत, भारत ने अपने महत्वाकांक्षी NDCs प्रस्तुत किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
ये प्रतिबद्धताएँ दर्शाती हैं कि भारत वैश्विक जलवायु कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। UPTET EVS परीक्षा के लिए, भारत की इन प्रतिबद्धताओं और इन समझौतों में उसकी भूमिका को समझना आवश्यक है। Unictest पर आपको ऐसे और भी महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी और अभ्यास सामग्री मिलेगी, जो आपकी UPTET 2026 की तैयारी को मजबूत करेगी।