Unictest Team
Updated: 2026-05-12 · English
भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) या अन्य पदों पर भर्ती के लिए मेडिकल फिटनेस एक महत्वपूर्ण चरण है। इसमें आंखों की जांच (Eye Test) सबसे सख्त होती है, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जिन्होंने LASIK (लेसिक) सर्जरी करवाई है। कई उम्मीदवारों को यह चिंता रहती है कि क्या रेलवे मेडिकल में LASIK फ्लैप का पता चल पाएगा और क्या वे इसके बाद भी योग्य माने जाएंगे। Unictest आपके लिए लाया है इस विषय पर विस्तृत जानकारी।
रेलवे में सुरक्षा कारणों से, कर्मचारियों की शारीरिक और मानसिक फिटनेस उच्च स्तर की होनी चाहिए। विशेष रूप से, ट्रेन चालकों और अन्य परिचालन कर्मचारियों के लिए आंखों की रोशनी और दृष्टि संबंधी मानक बहुत कड़े होते हैं। LASIK सर्जरी में कॉर्निया की आकृति को लेजर से बदला जाता है ताकि बिना चश्मे के स्पष्ट दृष्टि मिल सके। इस प्रक्रिया में अक्सर कॉर्निया पर एक पतला 'फ्लैप' बनाया जाता है, जिसे बाद में वापस अपनी जगह पर रख दिया जाता है। हालांकि, यह फ्लैप पूरी तरह से ठीक नहीं होता और कुछ तरीकों से इसका पता लगाया जा सकता है।
रेलवे डॉक्टर्स LASIK फ्लैप का पता कैसे लगाते हैं?
रेलवे मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर अत्यधिक प्रशिक्षित होते हैं और उनके पास LASIK सर्जरी का पता लगाने के लिए कई उपकरण और तकनीकें होती हैं। यहां कुछ प्रमुख तरीके दिए गए हैं:
- स्लिट लैंप एग्जामिनेशन (Slit Lamp Examination): यह सबसे आम और प्रभावी तरीका है। स्लिट लैंप एक माइक्रोस्कोप होता है जिसमें तेज रोशनी होती है, जिससे डॉक्टर कॉर्निया की सतह पर LASIK फ्लैप के निशान, जैसे कि फ्लैप की धार (flap edge), माइक्रो-स्ट्राई (micro-striae) या हीलिंग पैटर्न को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। यह बहुत बारीकी से जांच करता है।
- कॉर्नियल टोपोग्राफी/टोमोग्राफी (Corneal Topography/Tomography): ये advanced diagnostic उपकरण कॉर्निया की सतह की विस्तृत मैपिंग करते हैं। LASIK सर्जरी के बाद कॉर्निया की वक्रता (curvature) में विशिष्ट परिवर्तन आते हैं, जिन्हें इन मशीनों द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है। इसमें कॉर्निया की मोटाई (pachymetry) और आकार में हुए बदलाव भी सामने आ जाते हैं।
- प्यूपिल डाइलटेशन (Pupil Dilation): कुछ मामलों में, आंखों की पुतलियों को फैलाया जाता है (आंखों में ड्रॉप डालकर) ताकि डॉक्टर रेटिना और ऑप्टिक नर्व के साथ-साथ कॉर्निया के पिछले हिस्से की भी बेहतर जांच कर सकें। इससे LASIK के बाद होने वाले subtle changes का भी पता चल सकता है।
- विजुअल एक्यूइटी टेस्ट (Visual Acuity Test): हालांकि LASIK के बाद दृष्टि 6/6 हो सकती है, डॉक्टर यह भी जांचते हैं कि क्या दृष्टि बिना किसी सर्जिकल हस्तक्षेप के स्वाभाविक रूप से प्राप्त हुई है। वे आपकी पिछली मेडिकल हिस्ट्री और चश्मे के नंबर के बारे में भी पूछताछ कर सकते हैं।
- कैंडिडेट की मेडिकल हिस्ट्री: कई बार उम्मीदवार स्वयं अपनी LASIK सर्जरी के बारे में बता देते हैं या उनके पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स में इसका उल्लेख होता है। ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है, क्योंकि झूठ बोलने पर बाद में गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि रेलवे बोर्ड LASIK सर्जरी को आमतौर पर स्वीकार नहीं करता है क्योंकि फ्लैप से जुड़े संभावित जोखिम होते हैं, जैसे कि फ्लैप का विस्थापन (flap dislocation) या अन्य जटिलताएं, जो आपातकालीन स्थितियों में दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, यदि आपने LASIK करवाई है, तो आपको रेलवे मेडिकल मानकों को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।