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Study Notes

UPTET के लिए Thorndike और Pavlov के अधिगम सिद्धांत: एक संपूर्ण अध्ययन

Mastering Learning Theories: Thorndike और Pavlov के सिद्धांत UPTET के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका

Practice Questions
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Unictest Team

Updated: 2026-04-19 · English

UPTET के लिए Thorndike और Pavlov के अधिगम सिद्धांत: एक संपूर्ण अध्ययन

शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (Child Development & Pedagogy) खंड में अधिगम के सिद्धांत (Learning Theories) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इन सिद्धांतों को समझना न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए आवश्यक है, बल्कि एक प्रभावी शिक्षक बनने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस लेख में, हम Edward Thorndike और Ivan Pavlov के प्रमुख अधिगम सिद्धांतों का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो UPTET 2026 परीक्षा के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

एडवर्ड थॉर्नडाइक का प्रयत्न एवं त्रुटि का सिद्धांत (Thorndike's Trial and Error Theory)

Edward Thorndike (1874-1949) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्हें आधुनिक शैक्षिक मनोविज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने अधिगम के क्षेत्र में 'प्रयत्न एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) प्रतिपादित किया, जिसे 'संबंधवाद का सिद्धांत' (Connectionism Theory) भी कहा जाता है। थॉर्नडाइक का मानना था कि अधिगम उत्तेजना (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के बीच संबंध स्थापित होने से होता है।

मुख्य बिंदु: थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोग भूखी बिल्ली पर किए, जिसे एक पहेली बॉक्स (Puzzle Box) में बंद कर दिया गया था। बाहर भोजन रखा गया था, और बिल्ली को लीवर दबाकर बाहर आना था।

थॉर्नडाइक के प्रयोग (Thorndike's Experiment)

थॉर्नडाइक ने एक भूखी बिल्ली को एक विशेष बॉक्स में रखा जिसे 'पहेली बॉक्स' (Puzzle Box) कहा जाता था। बॉक्स के बाहर मछली का एक टुकड़ा रखा गया था। बॉक्स के अंदर एक लीवर था जिसे दबाने पर दरवाजा खुल जाता था। शुरुआत में, बिल्ली ने बाहर निकलने के लिए कई यादृच्छिक प्रयास किए - इधर-उधर भागना, पंजा मारना, काटना। धीरे-धीरे, इन प्रयासों के दौरान, बिल्ली गलती से लीवर पर पंजा मार देती थी और दरवाजा खुल जाता था। कई बार दोहराने के बाद, बिल्ली ने सीख लिया कि लीवर दबाने से दरवाजा खुलता है और वह भोजन तक पहुंच सकती है। प्रयासों की संख्या कम होती गई और अंततः बिल्ली बिना किसी त्रुटि के सीधे लीवर दबाने लगी।

अधिगम के नियम (Laws of Learning)

थॉर्नडाइक ने अपने सिद्धांत के आधार पर अधिगम के कुछ महत्वपूर्ण नियम प्रतिपादित किए, जिन्हें UPTET के दृष्टिकोण से समझना बहुत जरूरी है:

प्राथमिक नियम (Primary Laws):
  • तत्परता का नियम (Law of Readiness): यह नियम बताता है कि जब कोई व्यक्ति सीखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होता है, तो वह अधिक प्रभावी ढंग से सीखता है। यदि कोई सीखने के लिए तैयार नहीं है, तो सीखना अप्रभावी या कष्टप्रद हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि छात्र सीखने को उत्सुक हैं, तो वे बेहतर सीख पाएंगे।
  • अभ्यास का नियम (Law of Exercise): इस नियम के अनुसार, किसी कार्य का बार-बार अभ्यास करने से उस कार्य को सीखने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि अभ्यास की कमी से सीखे हुए कार्य को भूलने की संभावना होती है। इसे उपयोग का नियम (Law of Use) और अनुपयोग का नियम (Law of Disuse) में बांटा गया है। 'Practice makes a man perfect' इसी पर आधारित है।
  • प्रभाव का नियम (Law of Effect): यह नियम कहता है कि अधिगम तब अधिक प्रभावी होता है जब उसके परिणाम संतोषजनक होते हैं। यदि किसी कार्य से सुखद परिणाम मिलते हैं, तो उसे दोहराने की संभावना बढ़ जाती है; यदि परिणाम असंतोषजनक होते हैं, तो उसे दोहराने की संभावना कम हो जाती है। पुरस्कार और दंड इसी नियम पर आधारित हैं।
गौण नियम (Secondary Laws):
  • बहु-अनुक्रिया का नियम (Law of Multiple Response): किसी भी नई परिस्थिति में व्यक्ति विभिन्न प्रकार की अनुक्रियाएँ करता है जब तक कि उसे सही अनुक्रिया नहीं मिल जाती।
  • मानसिक वृत्ति या मनोवृत्ति का नियम (Law of Set or Attitude): सीखने वाले की मानसिक स्थिति सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। सकारात्मक मनोवृत्ति अधिगम को सुगम बनाती है।
  • आंशिक क्रिया का नियम (Law of Partial Activity): व्यक्ति किसी समस्या के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है और केवल महत्वपूर्ण भागों को चुनकर प्रतिक्रिया करता है।
  • समानता का नियम (Law of Analogy): व्यक्ति नई स्थिति में पुरानी, समान स्थितियों में की गई अनुक्रियाओं का उपयोग करता है।
  • साहचर्य परिवर्तन का नियम (Law of Associative Shifting): एक अनुक्रिया को एक उत्तेजना से दूसरी उत्तेजना में स्थानांतरित किया जा सकता है, बशर्ते कि दोनों उत्तेजनाएं एक साथ कई बार प्रस्तुत की जाएं।

थॉर्नडाइक के सिद्धांत के शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implications of Thorndike's Theory)

  • यह सिद्धांत बच्चों में प्रयत्न और त्रुटि के माध्यम से सीखने को प्रोत्साहित करता है।
  • शिक्षक को छात्रों को सीखने के लिए तैयार करना चाहिए (तत्परता का नियम)।
  • पुनरावृत्ति और अभ्यास (अभ्यास का नियम) को महत्व दिया जाना चाहिए, खासकर गणित और भाषा सीखने में।
  • पुरस्कार और प्रोत्साहन (प्रभाव का नियम) का उपयोग छात्रों को सकारात्मक व्यवहार और अधिगम के लिए प्रेरित करने हेतु किया जाना चाहिए।
  • यह सिद्धांत मंदबुद्धि बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि वे बार-बार प्रयास से सीखते हैं।
  • यह आदत निर्माण (Habit Formation) में सहायक है।

Important Topics Data

अधिगम का नियम (Law of Learning)विवरण (Description)शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implication)
तत्परता का नियम (Law of Readiness)व्यक्ति सीखने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए।शिक्षक छात्रों में सीखने की जिज्ञासा उत्पन्न करें; उनकी परिपक्वता का ध्यान रखें।
अभ्यास का नियम (Law of Exercise)किसी कार्य का बार-बार अभ्यास करने से सीखना मजबूत होता है (उपयोग का नियम); अभ्यास न करने से भूल जाते हैं (अनुपयोग का नियम)।गणित, भाषा, कौशल सीखने में पुनरावृत्ति और अभ्यास पर जोर दें।
प्रभाव का नियम (Law of Effect)सीखने के परिणाम संतोषजनक होने पर अधिगम मजबूत होता है, असंतोषजनक होने पर कमजोर होता है।सकारात्मक पुनर्बलन (पुरस्कार, प्रशंसा) का उपयोग करें; दंड से बचें।
बहु-अनुक्रिया का नियम (Law of Multiple Response)नई स्थिति में व्यक्ति समस्या हल करने के लिए कई प्रयास करता है।छात्रों को विभिन्न तरीकों से समस्या हल करने का अवसर दें।
मानसिक वृत्ति का नियम (Law of Set or Attitude)सीखने वाले की मानसिक स्थिति सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।छात्रों में सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और रुचि विकसित करें।
आंशिक क्रिया का नियम (Law of Partial Activity)समस्या के महत्वपूर्ण भागों पर ध्यान केंद्रित करके प्रतिक्रिया देना।जटिल विषयों को छोटे, प्रबंधनीय भागों में तोड़कर पढ़ाएं।

Detailed Notes

इवान पावलॉव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत (Pavlov's Classical Conditioning Theory)

Ivan Petrovich Pavlov (1849-1936) एक रूसी शरीर विज्ञानी थे जिन्हें पाचन तंत्र पर उनके शोध के लिए 1904 में नोबेल पुरस्कार मिला था। उनके प्रयोगों ने 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) को जन्म दिया, जिसे 'प्रतिवादी अनुबंधन' (Respondent Conditioning) या 'S-Type Conditioning' भी कहा जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि कैसे एक तटस्थ उत्तेजना (Neutral Stimulus) एक प्राकृतिक उत्तेजना के साथ बार-बार जोड़े जाने पर एक अनुक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता प्राप्त कर लेती है।

मुख्य बिंदु: पावलॉव ने अपने प्रयोग कुत्तों पर किए, जिसमें उन्होंने घंटी की आवाज (तटस्थ उत्तेजना) को भोजन (प्राकृतिक उत्तेजना) से जोड़ा ताकि लार टपकने की अनुक्रिया (Response) पैदा की जा सके।

पावलॉव के प्रयोग (Pavlov's Experiment)

पावलॉव ने एक कुत्ते पर प्रयोग किया। उन्होंने कुत्ते के मुंह से लार इकट्ठा करने के लिए एक सर्जिकल ऑपरेशन किया।
प्रयोग के चरण:

  • पहले: भोजन (अस्वाभाविक उत्तेजना - UCS) प्रस्तुत करने पर कुत्ता लार (अस्वाभाविक अनुक्रिया - UCR) टपकाता था। घंटी (तटस्थ उत्तेजना - NS) बजाने पर कोई लार नहीं टपकती थी।
  • दौरान: घंटी (NS) को भोजन (UCS) के साथ कई बार एक साथ प्रस्तुत किया गया। हर बार घंटी बजने के तुरंत बाद भोजन दिया जाता था, और कुत्ता लार टपकाता था।
  • बाद में: कुछ समय बाद, केवल घंटी (अब स्वाभाविक उत्तेजना - CS) बजाने पर भी कुत्ता लार (स्वाभाविक अनुक्रिया - CR) टपकाने लगा, भले ही भोजन मौजूद न हो।
इस प्रकार, घंटी, जो पहले एक तटस्थ उत्तेजना थी, अब लार टपकने की अनुक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम हो गई थी।

शास्त्रीय अनुबंधन की मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts of Classical Conditioning)

  • अस्वाभाविक उत्तेजना (Unconditioned Stimulus - UCS): एक उत्तेजना जो स्वाभाविक रूप से और बिना किसी पूर्व सीखने के एक अनुक्रिया उत्पन्न करती है (जैसे भोजन)।
  • अस्वाभाविक अनुक्रिया (Unconditioned Response - UCR): एक प्राकृतिक और बिना सीखी हुई अनुक्रिया जो UCS के जवाब में होती है (जैसे भोजन देखकर लार टपकना)।
  • स्वाभाविक उत्तेजना (Conditioned Stimulus - CS): एक तटस्थ उत्तेजना जो UCS के साथ बार-बार जोड़े जाने के बाद एक सीखी हुई अनुक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता प्राप्त कर लेती है (जैसे घंटी की आवाज)।
  • स्वाभाविक अनुक्रिया (Conditioned Response - CR): एक सीखी हुई अनुक्रिया जो CS के जवाब में होती है (जैसे घंटी सुनकर लार टपकना)।
  • अर्जन (Acquisition): वह प्रक्रिया जिसके द्वारा CS और UCS के बीच संबंध स्थापित होता है और CR विकसित होता है।
  • विलुप्तीकरण (Extinction): यदि CS को UCS के बिना बार-बार प्रस्तुत किया जाता है, तो CR धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है और अंततः समाप्त हो जाती है।
  • स्वतः पुनर्लाभ (Spontaneous Recovery): विलुप्तीकरण के बाद कुछ समय के अंतराल पर, CR बिना किसी अतिरिक्त प्रशिक्षण के फिर से प्रकट हो सकती है, हालांकि यह अक्सर कमजोर होती है।
  • उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization): व्यक्ति या जानवर मूल CS के समान उत्तेजनाओं के प्रति भी CR प्रदर्शित करता है। उदाहरण के लिए, यदि कुत्ता घंटी की जगह किसी और समान ध्वनि पर भी लार टपकाए।
  • उद्दीपक विभेदन (Stimulus Discrimination): व्यक्ति या जानवर विभिन्न उत्तेजनाओं के बीच अंतर करना सीखता है और केवल विशिष्ट CS के प्रति ही CR प्रदर्शित करता है।

पावलॉव के सिद्धांत के शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implications of Pavlov's Theory)

  • यह सिद्धांत आदतों के निर्माण (जैसे स्वच्छता, अनुशासन) और बुरी आदतों को तोड़ने में मदद करता है।
  • यह डर, चिंता और फोबिया जैसी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को समझने और उनका इलाज करने में सहायक है।
  • शिक्षक छात्रों में सकारात्मक दृष्टिकोण और भावनाएं विकसित करने के लिए इस सिद्धांत का उपयोग कर सकते हैं, जैसे स्कूल या किसी विषय के प्रति सकारात्मक भावना।
  • कक्षा प्रबंधन में भी इसका उपयोग किया जा सकता है, जहाँ कुछ संकेतों (जैसे हाथ उठाना) को वांछित व्यवहार (जैसे शांति से जवाब देना) से जोड़ा जा सकता है।
  • भाषा सीखने में भी इसका प्रयोग होता है, जहाँ शब्दों को वस्तुओं या क्रियाओं से जोड़ा जाता है।

Important Questions & Tips

UPTET के लिए Thorndike और Pavlov के सिद्धांतों की तैयारी कैसे करें?

UPTET परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र खंड में इन सिद्धांतों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। अपनी तैयारी को मजबूत बनाने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें:

  • अवधारणाओं को समझें: दोनों सिद्धांतों की मूल अवधारणाओं, जैसे Thorndike के नियम (Law of Readiness, Exercise, Effect) और Pavlov के पद (UCS, UCR, CS, CR), को गहराई से समझें।
  • उदाहरणों पर ध्यान दें: दोनों सिद्धांतों के प्रयोगों और उनके शैक्षिक निहितार्थों को वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जोड़कर समझने का प्रयास करें। UPTET में अक्सर अनुप्रयोगात्मक प्रश्न (Application-based questions) पूछे जाते हैं।
  • तुलनात्मक अध्ययन: दोनों सिद्धांतों के बीच समानताओं और अंतरों को पहचानें। कौन सा सिद्धांत किस प्रकार के अधिगम की व्याख्या करता है, यह समझना महत्वपूर्ण है।
  • पिछले वर्षों के प्रश्न: UPTET और अन्य TET परीक्षाओं में इन सिद्धांतों से पूछे गए पिछले वर्षों के प्रश्नों का अभ्यास करें। इससे आपको प्रश्न पैटर्न और महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी मिलेगी।
  • नोट्स बनाएं: संक्षिप्त और स्पष्ट नोट्स बनाएं जिनमें मुख्य बिंदु, नियम और उदाहरण शामिल हों। ये नोट्स अंतिम समय की पुनरावृत्ति के लिए बहुत उपयोगी होंगे।
  • Unictest के साथ अभ्यास करें: Unictest पर उपलब्ध मॉक टेस्ट और अभ्यास सेट का उपयोग करके अपनी तैयारी का मूल्यांकन करें।
परीक्षा तैयारी टिप: इन सिद्धांतों को केवल रटने की बजाय, इनके शैक्षणिक अनुप्रयोगों (Educational Applications) पर विशेष ध्यान दें। एक शिक्षक के रूप में आप इन सिद्धांतों का उपयोग बच्चों को बेहतर ढंग से सिखाने में कैसे कर सकते हैं, यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

Thorndike का प्रयत्न एवं त्रुटि का सिद्धांत और Pavlov का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत अधिगम मनोविज्ञान के आधारभूत स्तंभ हैं। UPTET 2026 की तैयारी के लिए इन सिद्धांतों की गहरी समझ आवश्यक है। Unictest आपकी तैयारी में सहायता करने के लिए विस्तृत अध्ययन सामग्री, अभ्यास प्रश्न और मॉक टेस्ट प्रदान करता है। अपनी तैयारी को नई दिशा देने के लिए आज ही Unictest से जुड़ें और अपने शिक्षक बनने के सपने को साकार करें।

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Frequently Asked Questions (UPTET)

Thorndike's theory (Trial and Error) focuses on instrumental learning, where an organism learns through the consequences of its actions, emphasizing voluntary responses. Pavlov's theory (Classical Conditioning) focuses on associative learning, where an organism learns to associate a neutral stimulus with a natural one, leading to involuntary responses. Both are crucial for understanding different aspects of learning in children for UPTET.

Thorndike proposed three primary laws of learning that are essential for UPTET. These are the Law of Readiness (तत्परता का नियम), which states one learns best when prepared; the Law of Exercise (अभ्यास का नियम), highlighting the importance of practice; and the Law of Effect (प्रभाव का नियम), which suggests that learning is strengthened by satisfying outcomes and weakened by dissatisfying ones.

In Pavlov's Classical Conditioning, 'extinction' refers to the gradual weakening and eventual disappearance of a conditioned response (CR) when the conditioned stimulus (CS) is presented repeatedly without the unconditioned stimulus (UCS). In education, it's relevant for breaking undesirable habits or fears. For example, if a child fears school (CR) due to a past negative experience (UCS), positive reinforcement (presenting CS without UCS) can help extinguish that fear.

These theories are fundamental to the Child Development & Pedagogy section of the UPTET exam because they explain how children learn and develop behaviors. Understanding them helps future teachers design effective teaching strategies, manage classroom behavior, foster positive learning attitudes, and address learning difficulties. They provide a foundational understanding of the psychological principles behind education.

Thorndike and Pavlov's theories are covered under the 'Learning' (अधिगम) sub-section of the Child Development & Pedagogy (बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र) section in the UPTET syllabus. Questions can range from direct definitions of laws and concepts to application-based scenarios where you need to identify which theory or principle is being applied in a classroom situation. Comparative questions between the two theories are also common.

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