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Study Notes

भारत और उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ: UPTET EVS के लिए महत्वपूर्ण | Major Tribes of India & UP for UPTET EVS

UPTET EVS में जनजातीय ज्ञान से पाएं पूरे अंक! जानें भारत और यूपी की मुख्य जनजातियों के बारे में। Get full marks in UPTET EVS with tribal knowledge! Learn about the main tribes of India and UP.

Practice Questions
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Unictest Team

Updated: 2026-04-20 · English

भारत और उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ: UPTET EVS के लिए महत्वपूर्ण | Major Tribes of India & UP for UPTET EVS

UPTET EVS (Environmental Studies) सेक्शन में भारत और उत्तर प्रदेश की जनजातियों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। यह विषय न केवल सामाजिक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता, भौगोलिक वितरण और पर्यावरण के साथ मानव संबंध को समझने में भी मदद करता है। Unictest आपको इस महत्वपूर्ण टॉपिक पर विस्तृत और परीक्षा-उन्मुख जानकारी प्रदान करता है ताकि आप UPTET परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।


जनजातियाँ (Tribes) ऐसे मानव समूह होते हैं जो एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में रहते हैं, जिनकी अपनी अलग संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और सामाजिक संरचना होती है। ये समुदाय अक्सर प्रकृति के करीब रहते हैं और उनके जीवन शैली में पर्यावरण का गहरा प्रभाव होता है। भारत में जनजातियों की संख्या और विविधता अद्भुत है, जो इसे मानवशास्त्रीय अध्ययन का एक समृद्ध क्षेत्र बनाती है। UPTET EVS के पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों को भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के साथ उनके संबंधों की समझ प्रदान करना है।


UPTET EVS में जनजातियों का महत्व

पर्यावरण अध्ययन (EVS) केवल पेड़-पौधों और जानवरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानव समाज और पर्यावरण के बीच के जटिल संबंधों का अध्ययन भी शामिल है। जनजातीय समुदाय अक्सर उन क्षेत्रों में रहते हैं जहाँ प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में होते हैं, और उनकी जीवन शैली अक्सर सतत विकास (Sustainable Development) का एक बेहतरीन उदाहरण होती है। UPTET परीक्षा के लिए, आपको निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए:

  • भौगोलिक वितरण: भारत और उत्तर प्रदेश में प्रमुख जनजातियाँ किन-किन क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
  • सांस्कृतिक विशेषताएँ: उनकी भाषा, नृत्य, संगीत, त्योहार, वेशभूषा और रीति-रिवाज।
  • आर्थिक गतिविधियाँ: उनकी आजीविका के मुख्य साधन जैसे कृषि, शिकार, वन उत्पाद संग्रहण।
  • सामाजिक संरचना: उनके परिवार और समुदाय की संरचना, नेतृत्व प्रणाली।
  • पर्यावरण से संबंध: वे कैसे पर्यावरण का संरक्षण करते हैं और उससे अपना जीवन यापन करते हैं।
ध्यान दें: UPTET EVS में जनजातियों से संबंधित प्रश्न सीधे उनकी पहचान, निवास स्थान या उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं पर आधारित हो सकते हैं। इसलिए तथ्यात्मक जानकारी पर विशेष ध्यान दें।

भारत में 700 से अधिक जनजातीय समूह हैं, जिनमें से कई को 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह' (Particularly Vulnerable Tribal Groups - PVTGs) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उत्तर प्रदेश में भी कई महत्वपूर्ण जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनके बारे में जानना UPTET परीक्षा के लिए अनिवार्य है। आइए, इन जनजातियों का विस्तृत अध्ययन करें और अपनी तैयारी को मजबूत करें।

Important Topics Data

जनजाति (Tribe)प्रमुख निवास स्थान (Main Region)प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)UPTET EVS महत्व (EVS Relevance)
गोंड (Gond)मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेशभारत का सबसे बड़ा जनजातीय समूह, गोंड पेंटिंग, कृषिसांस्कृतिक विविधता, भौगोलिक वितरण
भील (Bhil)राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्रभारत का दूसरा सबसे बड़ा समूह, धनुर्विद्या, लोकनृत्यसामाजिक संरचना, पारंपरिक कौशल
संथाल (Santhal)झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशाकृषि आधारित, सरहुल त्योहार, समृद्ध लोक कलापूर्वी भारत की संस्कृति, त्योहार
मुंडा (Munda)झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़कृषि अर्थव्यवस्था, मुंडारी भाषा, बिरसा मुंडाऐतिहासिक योगदान, भाषाविज्ञान
थारू (Tharu)उत्तर प्रदेश (तराई क्षेत्र), उत्तराखंड, बिहारयूपी की सबसे बड़ी जनजाति, दिवाली को शोक पर्व, चावल मुख्य भोजनउत्तर प्रदेश की विशिष्ट पहचान
टोडा (Toda)नीलगिरि पहाड़ियाँ, तमिलनाडुपशुपालन (भैंस), विशिष्ट झोपड़ियाँ, मातृसत्तात्मकपर्यावरण के साथ संबंध, दक्षिणी भारत
खासी (Khasi)मेघालय, असममातृवंशीय समाज, कृषि, विशिष्ट उत्सवपूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, मातृसत्ता

Detailed Notes

भारत की प्रमुख जनजातियाँ और उनकी विशेषताएँ | Major Tribes of India and their Characteristics

भारत विविध जनजातीय समुदायों का घर है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अनूठी पहचान है। UPTET EVS के दृष्टिकोण से, कुछ प्रमुख जनजातियों को जानना अत्यंत आवश्यक है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण जनजातियाँ और उनसे संबंधित तथ्य दिए गए हैं:

  • गोंड (Gond): यह भारत का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में पाया जाता है। गोंड अपनी कला, विशेष रूप से गोंड पेंटिंग, और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाने जाते हैं।
  • भील (Bhil): यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में केंद्रित है। भील अपनी धनुर्विद्या और वीर परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। 'भील' शब्द 'बिल' से आया है जिसका अर्थ 'धनुष' है।
  • संथाल (Santhal): यह पूर्वी भारत की एक प्रमुख जनजाति है, जो झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा में पाई जाती है। संथाल अपनी कृषि पद्धतियों, नृत्य और संगीत के लिए जाने जाते हैं। उनका प्रमुख त्योहार 'सरहुल' है।
  • मुंडा (Munda): यह मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में निवास करती है। मुंडा अपनी कृषि अर्थव्यवस्था और अपनी भाषा 'मुंडारी' के लिए जाने जाते हैं। बिरसा मुंडा एक प्रसिद्ध मुंडा स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • ओरांव (Oraon): यह झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में पाई जाने वाली एक और महत्वपूर्ण जनजाति है। ओरांव कृषि पर आधारित समुदाय हैं और उनकी अपनी भाषा 'कुरुख' है।
  • खासी (Khasi): यह मेघालय में पाई जाने वाली एक मातृवंशीय जनजाति है। खासी समुदाय में संपत्ति और वंश का निर्धारण माँ के माध्यम से होता है।
  • टोडा (Toda): नीलगिरि पहाड़ियों (तमिलनाडु) में निवास करने वाली यह जनजाति अपनी विशिष्ट झोपड़ियों और भैंस पालन के लिए प्रसिद्ध है।
  • नागा (Naga): नागालैंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में कई नागा जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट वेशभूषा, नृत्य और त्योहार हैं।

इन जनजातियों के अलावा, भारत में और भी कई महत्वपूर्ण जनजातियाँ हैं जैसे जारवा और सेंटिनली (अंडमान-निकोबार), लेपचा (सिक्किम), गद्दी (हिमाचल प्रदेश), आदि। UPTET EVS के लिए इन जनजातियों के नाम, उनके निवास स्थान और एक या दो प्रमुख विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।


जनजातीय जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण

जनजातीय समुदाय सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहते आए हैं। उनकी जीवनशैली में पर्यावरण संरक्षण के कई अनूठे तरीके शामिल होते हैं। वे वनों को पवित्र मानते हैं, जल स्रोतों का सम्मान करते हैं और संसाधनों का उपभोग केवल आवश्यकतानुसार करते हैं। UPTET EVS में ऐसे प्रश्न आ सकते हैं जो जनजातियों के पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं या उनके पारंपरिक ज्ञान से संबंधित हों। उदाहरण के लिए, वे कैसे झूम कृषि (Slash and Burn cultivation) करते हैं, या कैसे वन उत्पादों का संग्रहण करते हैं।

Quick Tip: भारत सरकार द्वारा जनजातियों के कल्याण के लिए चलाए जा रहे कुछ प्रमुख कार्यक्रमों और संवैधानिक प्रावधानों पर भी एक नज़र डालें, जैसे अनुसूचित जनजाति आयोग।

Important Questions & Tips

उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ | Major Tribes of Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश, क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों ही दृष्टि से एक बड़ा राज्य है, जहाँ कई जनजातीय समुदाय निवास करते हैं। UPTET EVS परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की जनजातियों का विशेष ज्ञान होना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित जनजातियाँ पाई जाती हैं:

  • थारू (Tharu): यह उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है, जो मुख्य रूप से तराई क्षेत्र (महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बहराइच, लखीमपुर खीरी) में निवास करती है। थारू जनजाति दिवाली को शोक पर्व के रूप में मनाती है। इनका मुख्य भोजन चावल है।
  • गोंड (Gond): भारत की सबसे बड़ी जनजाति गोंड उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती और मिर्जापुर जिलों में भी पाई जाती है।
  • भुक्सा/भोक्सा (Buxa/Boksa): यह जनजाति मुख्य रूप से बिजनौर और आगरा जिलों में पाई जाती है। भुक्सा जनजाति के लोग अपनी बोली 'भुक्सा' बोलते हैं और इनका समाज पितृसत्तात्मक होता है।
  • जौनसारी (Jaunsari): यह जनजाति मुख्य रूप से देहरादून (उत्तराखंड) के निकटवर्ती उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों जैसे सहारनपुर और बिजनौर में पाई जाती है। यह बहुविवाह प्रथा के लिए जानी जाती थी, हालांकि अब इसमें परिवर्तन आ रहा है।
  • खरवार (Kharwar): यह जनजाति मुख्य रूप से देवरिया, बलिया, गाजीपुर, सोनभद्र और वाराणसी जिलों में पाई जाती है। खरवार समुदाय के लोग 'खरवारिया' नामक नृत्य करते हैं।
  • सहरिया (Sahariya): यह जनजाति ललितपुर जिले में पाई जाती है और अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं के लिए जानी जाती है।
  • परहिया (Parahiya): यह जनजाति सोनभद्र जिले में पाई जाती है।
  • बैगा (Baiga): यह जनजाति भी सोनभद्र में पाई जाती है।

महत्वपूर्ण सूचना: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2003 में 10 नई जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया था, जिससे कुल जनजातियों की संख्या 12 हो गई है। इनमें गोंड, खरवार, सहरिया, बैगा, परहिया, अगरिया, पटारी, चेरो, भुइयां/भुइया, पंखा/पनिका, ओझा, धुरिया शामिल हैं। थारू और भुक्सा/भोक्सा पहले से ही अनुसूचित जनजाति थीं।

UPTET EVS के लिए तैयारी के टिप्स

  • मानचित्र अध्ययन: भारत और उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर प्रमुख जनजातियों के निवास स्थानों को चिह्नित करें।
  • तथ्यात्मक नोट्स: प्रत्येक जनजाति के नाम, राज्य/जिला, प्रमुख विशेषता (जैसे त्योहार, भाषा, विशेष प्रथा) के संक्षिप्त नोट्स बनाएं।
  • पिछले वर्षों के प्रश्न: UPTET के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करें ताकि यह समझा जा सके कि इस विषय से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • रिवीजन: नियमित रूप से इन तथ्यों का रिवीजन करें ताकि जानकारी स्मृति में बनी रहे।

Unictest पर आपको UPTET EVS के लिए ऐसे ही उपयोगी अध्ययन सामग्री और अभ्यास प्रश्न मिलेंगे। अपनी तैयारी को नई दिशा देने के लिए आज ही Unictest से जुड़ें!

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Frequently Asked Questions (UPTET)

भारत और उत्तर प्रदेश की जनजातियाँ UPTET EVS पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग हैं क्योंकि वे देश की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता, पर्यावरण के साथ मानव संबंध, पारंपरिक ज्ञान और भौगोलिक वितरण को दर्शाती हैं। इन समुदायों का अध्ययन उम्मीदवारों को पर्यावरण, समाज और संस्कृति के अंतर्संबंधों को समझने में मदद करता है, जो EVS के लिए आवश्यक है।

UPTET EVS के लिए भारत की सबसे प्रमुख जनजातियों में गोंड (सबसे बड़ी), भील (दूसरी सबसे बड़ी), संथाल, मुंडा, ओरांव, खासी और टोडा शामिल हैं। इन जनजातियों के निवास स्थान, उनकी मुख्य सांस्कृतिक विशेषताएँ और पर्यावरण से संबंधित प्रथाओं को जानना महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियों में थारू (सबसे बड़ी), गोंड, भुक्सा/भोक्सा, खरवार, जौनसारी और सहरिया शामिल हैं। थारू जनजाति दिवाली को शोक पर्व के रूप में मनाती है, जबकि भुक्सा जनजाति बिजनौर में पाई जाती है। UPTET EVS में इनके निवास स्थान और विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं पर प्रश्न आ सकते हैं।

इस विषय की तैयारी के लिए आप प्रमुख जनजातियों के नाम, उनके निवास स्थान (राज्य/जिला), और एक या दो मुख्य विशेषताओं के संक्षिप्त नोट्स बनाएं। भारत और यूपी के मानचित्रों का उपयोग करके उनके वितरण को समझें। UPTET के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करें और नियमित रूप से रिवीजन करें। Unictest पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री का भी उपयोग करें।

जनजातीय समुदाय सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहते आए हैं। उनकी जीवनशैली में वनों, जल स्रोतों और भूमि के संरक्षण के पारंपरिक तरीके शामिल हैं। वे संसाधनों का अत्यधिक दोहन नहीं करते और अक्सर पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं का पालन करते हैं। UPTET EVS में यह प्रासंगिक है क्योंकि यह सतत विकास, पारंपरिक ज्ञान और मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया के महत्व को दर्शाता है।

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