UPTET Hindi साहित्य: जयशंकर प्रसाद - छायावाद के प्रमुख स्तंभ | Jaishankar Prasad - Pillar of Chhayavad in Hindi Literature
Practice QuestionsUnictest Team
Updated: 2026-04-20 · English
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) की तैयारी कर रहे सभी उम्मीदवारों के लिए हिंदी साहित्य का 'छायावाद' खंड अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस खंड के अग्रदूतों में से एक हैं महान कवि, नाटककार और उपन्यासकार जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad)। उन्हें 'छायावाद के ब्रह्मा' के रूप में भी जाना जाता है। इस लेख में हम जयशंकर प्रसाद के जीवन परिचय, उनकी प्रमुख रचनाओं और UPTET परीक्षा के लिए उनके साहित्यिक योगदान की गहराई से चर्चा करेंगे।
छायावाद हिंदी साहित्य के आधुनिक काल की एक महत्वपूर्ण काव्यधारा है, जिसका समय लगभग 1918 से 1936 तक माना जाता है। यह द्विवेदी युग की इतिवृत्तात्मकता और उपदेशात्मकता के विरोध में एक प्रतिक्रिया के रूप में उभरा। छायावाद में व्यक्तिवाद, प्रकृति प्रेम, सौंदर्य बोध, रहस्यवाद और वेदना की प्रधानता होती है। जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और महादेवी वर्मा को छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ (बृहत्त्रयी और लघुत्रयी) माना जाता है।
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम देवीप्रसाद और माता का नाम मुन्नी देवी था। उनका परिवार 'सुंघनी साहू' के नाम से प्रसिद्ध था, जो तंबाकू के व्यापार से जुड़ा था। प्रसाद जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की और संस्कृत, हिंदी, उर्दू, फारसी तथा अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया। किशोरावस्था में ही माता-पिता और बड़े भाई के निधन के कारण उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालना पड़ा, लेकिन उन्होंने साहित्य साधना नहीं छोड़ी।
प्रसाद जी ने अपनी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन को अत्यंत कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी कविताएँ मानवीय भावनाओं, प्रकृति के मनोहारी दृश्यों और रहस्यवादी अनुभूतियों से ओत-प्रोत हैं। उन्होंने न केवल कविता के क्षेत्र में बल्कि नाटक और उपन्यास में भी अपना अमूल्य योगदान दिया, जिससे हिंदी साहित्य को एक नई दिशा मिली। UPTET aspirants को उनके जीवन और कृतित्व के महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि इनसे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
| रचना का प्रकार | प्रमुख रचना | मुख्य विषय/विशेषता | UPTET प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| महाकाव्य | कामायनी | मनु, श्रद्धा, इड़ा के माध्यम से मानव सभ्यता का विकास, दार्शनिक चिंतन | अत्यंत महत्वपूर्ण, सर्ग और पात्र पूछे जाते हैं |
| काव्य संग्रह | आँसू | विरह-वेदना, व्यक्तिगत प्रेम की मार्मिक अभिव्यक्ति, हिंदी का मेघदूत | महत्वपूर्ण, प्रसिद्ध पंक्तियाँ पूछी जाती हैं |
| काव्य संग्रह | लहर | प्रकृति प्रेम, सौंदर्य बोध, राष्ट्रीय चेतना से युक्त कविताएँ | सामान्यतः महत्वपूर्ण |
| काव्य संग्रह | झरना | छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला, शुरुआती छायावादी प्रवृत्तियाँ | महत्वपूर्ण, नाम अक्सर पूछा जाता है |
| नाटक | चंद्रगुप्त | मौर्यकालीन इतिहास, राष्ट्रीयता, वीरता और प्रेम | अत्यंत महत्वपूर्ण, पात्र और कथन |
| नाटक | स्कंदगुप्त | गुप्तकालीन इतिहास, शौर्य, त्याग और भारतीय संस्कृति | महत्वपूर्ण, पात्र और विषयवस्तु |
| नाटक | ध्रुवस्वामिनी | नारी-प्रधान नाटक, स्त्री अधिकारों और गरिमा का प्रश्न | अत्यंत महत्वपूर्ण, आधुनिक संदर्भ |
| उपन्यास | कंकाल | सामाजिक यथार्थवाद, समाज की विसंगतियों का चित्रण | सामान्यतः महत्वपूर्ण |
| उपन्यास | तितली | ग्रामीण जीवन, प्रेम और त्याग का चित्रण | सामान्यतः महत्वपूर्ण |
जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक सफर बहुआयामी रहा है, जिसमें उन्होंने कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास जैसी विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी रचनाएँ हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं और UPTET जैसी परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से आते हैं।
प्रसाद जी ने ऐतिहासिक नाटकों की रचना कर हिंदी नाट्य साहित्य को समृद्ध किया। उनके नाटकों में राष्ट्रीयता, भारतीय संस्कृति और आदर्शों का सुंदर चित्रण मिलता है।
उन्होंने यथार्थवादी और मनोवैज्ञानिक उपन्यास लिखे।
उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है, जिसमें तत्सम शब्दों की बहुलता है। उन्होंने बिंब-विधान और प्रतीकात्मकता का सुंदर प्रयोग किया है। UPTET परीक्षा में इन सभी बिंदुओं से प्रश्न बन सकते हैं, इसलिए गहन अध्ययन आवश्यक है। Unictest पर उपलब्ध हमारे अध्ययन सामग्री और मॉक टेस्ट आपको इन सभी पहलुओं में महारत हासिल करने में मदद करेंगे।
UPTET की हिंदी साहित्य खंड में जयशंकर प्रसाद से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए एक सुनियोजित तैयारी आवश्यक है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दिए गए हैं:
जयशंकर प्रसाद केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक युग-प्रवर्तक साहित्यकार थे जिन्होंने हिंदी साहित्य को एक नई पहचान दी। उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। UPTET परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए उनके योगदान को समझना और याद रखना अत्यंत आवश्यक है। Unictest आपको इस यात्रा में हर कदम पर सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी विशेषज्ञ टीम द्वारा तैयार की गई सामग्री और अभ्यास प्रश्न आपको आत्मविश्वास के साथ परीक्षा का सामना करने में मदद करेंगे।
नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन से आप निश्चित रूप से UPTET में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। अपनी तैयारी को Unictest के साथ नई ऊँचाइयों पर ले जाएँ!