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Study Notes

अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) के प्रकार: UP Police Constable 2026 के लिए संपूर्ण गाइड

Master Anupras Alankar: Types, Examples, and Key Concepts for UP Police Constable 2026 | अनुप्रास अलंकार के प्रकार और उदाहरण सीखें

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-04-30 · English

अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) के प्रकार: UP Police Constable 2026 के लिए संपूर्ण गाइड

प्रिय उम्मीदवारों, उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल परीक्षा 2026 में हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है 'अलंकार'. इसमें से 'अनुप्रास अलंकार' (Anupras Alankar) एक ऐसा विषय है जिससे अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं. इस विस्तृत गाइड में, हम अनुप्रास अलंकार के विभिन्न प्रकारों को गहराई से समझेंगे, उनके उदाहरण देखेंगे और यह भी जानेंगे कि आप इन्हें परीक्षा में कैसे पहचान सकते हैं.


अलंकार (Figures of Speech) काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व होते हैं. जिस प्रकार आभूषण नारी के सौंदर्य में चार चांद लगाते हैं, उसी प्रकार अलंकार भाषा को प्रभावशाली और आकर्षक बनाते हैं. हिंदी व्याकरण में अलंकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: शब्दालंकार (Shabdalankar) और अर्थालंकार (Arthalamkar). अनुप्रास अलंकार शब्दालंकार का एक प्रमुख भेद है.


अनुप्रास अलंकार क्या है? (What is Anupras Alankar?)

अनुप्रास अलंकार वहाँ होता है जहाँ किसी वर्ण (अक्षर) की आवृत्ति (repetition) दो या दो से अधिक बार होती है, जिससे काव्य में एक विशेष सौंदर्य और संगीतात्मकता आती है. 'अनु' का अर्थ है बार-बार और 'प्रास' का अर्थ है वर्णों का पास-पास आना. सरल शब्दों में, जब एक ही अक्षर बार-बार आता है, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है.


उदाहरण:
  • 'चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल-थल में।' (यहाँ 'च' वर्ण की आवृत्ति है)
  • 'तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।' (यहाँ 'त' वर्ण की आवृत्ति है)

UP Police Constable 2026 परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए आपको अनुप्रास अलंकार के केवल परिभाषा ही नहीं, बल्कि इसके विभिन्न प्रकारों को भी समझना होगा. आइए, अब अनुप्रास अलंकार के प्रमुख प्रकारों पर एक नजर डालते हैं.


अनुप्रास अलंकार के प्रमुख प्रकार (Types of Anupras Alankar)

हिंदी व्याकरण में अनुप्रास अलंकार को मुख्य रूप से पाँच भागों में बांटा गया है. इन सभी प्रकारों की अपनी विशिष्ट पहचान होती है, जिन्हें समझना परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:


  • छेकानुप्रास (Chhekanupras)
  • वृत्त्यनुप्रास (Vrityanupras)
  • श्रुत्यनुप्रास (Shrutyanupras)
  • अन्त्यानुप्रास (Antyanupras)
  • लाटानुप्रास (Latanupras)

इन सभी प्रकारों को समझना और उनके उदाहरणों को याद रखना आपको UP Police Constable 2026 परीक्षा के हिंदी अनुभाग में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा. आइए, अब हम इन सभी प्रकारों को विस्तार से समझते हैं.

Important Topics Data

अनुप्रास अलंकार का प्रकारपहचान / विशेषताउदाहरण
छेकानुप्रासवर्ण की आवृत्ति केवल एक बार (जोड़े में)'इस करुणा कलित हृदय में' (क, ल की आवृत्ति एक बार)
वृत्त्यनुप्रासएक वर्ण की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार'चारु चंद्र की चंचल किरणें' (च वर्ण की अनेक बार आवृत्ति)
श्रुत्यनुप्रासएक ही उच्चारण स्थान से उच्चारित वर्णों की आवृत्ति'तुलसीदास सीदत निसदिन' (त, स, द, न दंत्य वर्ण)
अन्त्यानुप्रासपद या चरण के अंत में समान स्वर/व्यंजन की आवृत्ति (तुकांतता)'रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम' (राम, सीताराम में 'राम' की आवृत्ति)
लाटानुप्रासशब्द या वाक्यखंड की आवृत्ति, पर अन्वय/अर्थ में भिन्नता'पूत सपूत तो क्यों धन संचय, पूत कपूत तो क्यों धन संचय'

Detailed Notes

अनुप्रास अलंकार के प्रत्येक प्रकार का विस्तृत विवरण (Detailed Explanation of Each Type)

प्रत्येक प्रकार की अपनी पहचान होती है, जिसे उदाहरणों के साथ समझना आवश्यक है:


  • 1. छेकानुप्रास (Chhekanupras):
    जहाँ वर्णों की आवृत्ति केवल एक बार हो (अर्थात कोई वर्ण लगातार दो बार आए), वहाँ छेकानुप्रास होता है. इसमें वर्णों का जोड़ा एक बार ही आता है.
    उदाहरण: 'इस करुणामयी हृदय में अब विकल रागिनी बजती।' (यहाँ 'क' और 'र' वर्ण की आवृत्ति एक बार हुई है).
    'रीझि रीझि रहसि रहसि हँसि हँसि उठै साँसें भरि आँसू भरि कहत दई दई।' (यहाँ 'रीझि रीझि', 'रहसि रहसि', 'हँसि हँसि', 'दई दई' में वर्णों की आवृत्ति एक बार हुई है).

  • 2. वृत्त्यनुप्रास (Vrityanupras):
    जहाँ एक वर्ण की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार हो, वहाँ वृत्त्यनुप्रास होता है. इसमें वर्णों की आवृत्ति बार-बार होती है.
    उदाहरण: 'तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।' (यहाँ 'त' वर्ण की आवृत्ति अनेक बार हुई है).
    'चंदन चोर चतुर चंचल चित चोरत है।' (यहाँ 'च' वर्ण की आवृत्ति कई बार हुई है).

  • 3. श्रुत्यनुप्रास (Shrutyanupras):
    जहाँ एक ही उच्चारण स्थान (जैसे कंठ, तालु, दंत आदि) से उच्चारित होने वाले वर्णों की आवृत्ति होती है, वहाँ श्रुत्यनुप्रास होता है. इसमें सुनने में मधुरता का अनुभव होता है.
    उदाहरण: 'दिनांत था, थे दिननाथ डूबते, सधेनु आते गृह ग्वाल बाल थे।' (यहाँ 'द', 'न', 'त' जैसे दंत्य वर्णों की आवृत्ति है).
    'तुलसीदास सीदत निसदिन देखत तुम्हारि निठुराई।' (यहाँ 'त', 'द', 'स', 'न' आदि दंत्य वर्णों की आवृत्ति है).

  • 4. अन्त्यानुप्रास (Antyanupras):
    जहाँ पद के अंत में या छंद के चरणों के अंत में समान स्वर या व्यंजन की आवृत्ति होती है, वहाँ अन्त्यानुप्रास होता है. इसे तुकांतता भी कहते हैं.
    उदाहरण: 'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर,
    जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।' (यहाँ 'सागर' और 'उजागर' में 'गर' की आवृत्ति है).
    'मांगते हैं सब सुखों की भीख,
    हमें देना है माँ! तेरी सीख।' (यहाँ 'भीख' और 'सीख' में 'ईख' की आवृत्ति है).

  • 5. लाटानुप्रास (Latanupras):
    जहाँ शब्द या वाक्यखंड की आवृत्ति होती है, लेकिन अन्वय (अर्थ) बदल जाता है, वहाँ लाटानुप्रास होता है. इसमें शब्दों का समूह दोहराया जाता है, पर उसका अर्थ प्रसंगवश भिन्न हो जाता है.
    उदाहरण: 'पूत सपूत तो क्यों धन संचय?
    पूत कपूत तो क्यों धन संचय?' (पहले में 'सपूत' के लिए धन संचय की आवश्यकता नहीं, दूसरे में 'कपूत' के लिए धन संचय व्यर्थ).
    'वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।' (पहले 'मनुष्य' का अर्थ मानव जाति, दूसरे का अर्थ परोपकारी व्यक्ति).

UP Police Constable 2026 तैयारी टिप: अनुप्रास अलंकार के इन सभी प्रकारों को अलग-अलग उदाहरणों के साथ अभ्यास करें. इससे आपको परीक्षा में इन्हें पहचानने में आसानी होगी.

Important Questions & Tips

UP Police Constable 2026 परीक्षा में अनुप्रास अलंकार का महत्व

UP Police Constable 2026 परीक्षा के हिंदी सेक्शन में अलंकार से संबंधित प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं. इनमें से अनुप्रास अलंकार एक ऐसा टॉपिक है जिससे सीधे प्रश्न आ सकते हैं, जैसे अलंकार का प्रकार पहचानना या दिए गए उदाहरण में कौन सा अलंकार है, यह बताना. इस विषय पर अच्छी पकड़ बनाने से आप आसानी से 2-3 अंक प्राप्त कर सकते हैं.


अलंकार पर पकड़ बनाने के लिए टिप्स (Tips to Master Alankar)

  • नियमित अभ्यास: विभिन्न प्रकार के काव्य पंक्तियों और वाक्यों में अलंकारों को पहचानने का अभ्यास करें.
  • उदाहरण याद करें: प्रत्येक अलंकार के कम से कम 2-3 प्रसिद्ध उदाहरणों को याद रखें. यह आपको परिभाषा समझने में मदद करेगा.
  • पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र: UP Police Constable के पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करें ताकि आपको प्रश्नों के पैटर्न का अंदाजा हो सके.
  • Unictest मॉक टेस्ट: Unictest पर उपलब्ध हिंदी व्याकरण के मॉक टेस्ट और क्विज़ का अभ्यास करें.

सावधान रहें: कई बार छात्र अनुप्रास और यमक अलंकार के बीच भ्रमित हो जाते हैं. याद रखें, अनुप्रास में वर्णों की आवृत्ति होती है, जबकि यमक में शब्दों की आवृत्ति होती है और हर बार उनका अर्थ भिन्न होता है.

हमें उम्मीद है कि यह विस्तृत गाइड आपको UP Police Constable 2026 परीक्षा के लिए अनुप्रास अलंकार को समझने में मदद करेगा. Unictest आपकी सफलता के लिए प्रतिबद्ध है! अपनी तैयारी को और मजबूत करने के लिए हमारे अन्य स्टडी मटेरियल और मॉक टेस्ट का लाभ उठाएं.

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Frequently Asked Questions (UP POLICE CONSTABLE)

अनुप्रास अलंकार वहाँ होता है जहाँ किसी वर्ण (अक्षर) की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार होती है, जिससे काव्य में सौंदर्य आता है. इसके मुख्य पाँच प्रकार हैं: छेकानुप्रास, वृत्त्यनुप्रास, श्रुत्यनुप्रास, अन्त्यानुप्रास और लाटानुप्रास. इन सभी प्रकारों की अपनी विशिष्ट पहचान और उदाहरण होते हैं.

छेकानुप्रास में वर्णों की आवृत्ति केवल एक बार होती है, यानी कोई वर्ण लगातार दो बार आता है. वहीं, वृत्त्यनुप्रास में एक वर्ण की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार होती है, यानी वर्ण बार-बार दोहराया जाता है. यह उनकी पहचान का मुख्य अंतर है.

UP Police Constable परीक्षा के हिंदी सेक्शन में अलंकार से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं. यह आपको हिंदी व्याकरण में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करता है. अलंकारों को समझना और पहचानना आपकी भाषा की समझ को दर्शाता है और यह स्कोरिंग टॉपिक होता है.

अनुप्रास अलंकार को पहचानने के लिए आपको यह देखना होगा कि क्या किसी वाक्य या काव्य पंक्ति में एक ही वर्ण (अक्षर) की आवृत्ति बार-बार हो रही है. उदाहरण के लिए, 'तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए' में 'त' वर्ण की आवृत्ति से आप अनुप्रास अलंकार को पहचान सकते हैं.

यमक अलंकार में एक शब्द की आवृत्ति होती है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है (जैसे 'कनक-कनक'). जबकि, अनुप्रास अलंकार में केवल वर्ण (अक्षर) की आवृत्ति होती है, शब्द की नहीं, और यह वर्णों की पुनरावृत्ति से काव्य में सौंदर्य उत्पन्न करता है. यह दोनों अलंकारों के बीच मुख्य अंतर है.

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