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Syllabus 2026

UP असिस्टेंट टीचर बाल शिक्षाशास्त्र सिलेबस विवरण - सुपर टीईटी 2026

सुपर टीईटी 2026 के लिए बाल शिक्षाशास्त्र सिलेबस जानें

Author

Yadvendra Singh Pal

Founder & Director,Unictest. M.Sc (Maths), MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET, KVS, DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.

Updated: 2026-08-09 · हिंदी

SUPER TET Syllabus 2026 — Overview

बाल शिक्षाशास्त्र (Child Pedagogy) का उद्देश्य बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समझना है। यह टीचिंग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अध्यापकों को यह जानने में मदद करता है कि बच्चे कैसे सीखते हैं और उन्हें क्या सिखाया जाना चाहिए। जब मैं अपने छात्रों को यह टॉपिक पढ़ाता हूँ, तो सबसे पहले मैं इस बात पर ध्यान केंद्रित करता हूँ कि बाल शिक्षाशास्त्र की मूल बातें क्या हैं। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को विभिन्न शिक्षण विधियों, विकासात्मक मनोविज्ञान, और मूल्यांकन के तरीकों के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। इस सिलेबस के तहत महत्वपूर्ण विषय पढ़ने से छात्रों की तैयारी में काफी सुधार होता है।

बाल शिक्षाशास्त्र की परिभाषा

बाल शिक्षाशास्त्र, या चाइल्ड पैडागॉजी, वह अध्ययन है जो बच्चों के सीखने और विकास के तंत्र को समझता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षकों के पास उन तकनीकों और विधियों का ज्ञान हो, जो बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समर्थन करती हैं। सिलेबस में शामिल तत्व बच्चों के विकास के विभिन्न चरणों और उनके शैक्षिक जरूरतों के समन्वय पर जोर देते हैं।

जब मैं अपने छात्रों को यह पढ़ाता हूँ, तो मुझे यह बताते हुए खुशी होती है कि यह विषय न केवल परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पेशेवर जीवन में भी उपयोगी साबित होता है। कल के शिक्षक आज की पीढ़ी को शिक्षित कर रहे हैं, इसलिए उनका ज्ञान बच्चों की विकासात्मक विशेषताओं को समझने में होना चाहिए।

इतिहास और पृष्ठभूमि

बाल शिक्षाशास्त्र का इतिहास बहुत पुराना है। विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों ने इस विषय में बहुमूल्य योगदान दिया है। प्लेटो, अरस्तू, और जॉन लॉक जैसे विद्वानों ने बच्चों के शैक्षणिक विकास पर विचार किए हैं। इसलिए, इस सिलेबस में उन ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि विद्यार्थी यह समझ सकें कि शिक्षाशास्त्र कैसे विकसित हुआ है।

पिछले कुछ वर्षों में, इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आए हैं, जैसे कि गार्डनर का बहु-प्रज्ञा सिद्धांत और विक्टोरिया की सामाजिक विकास सिद्धांत। यह सभी सिद्धांत बच्चों को विभिन्न तरीकों से सीखने में सहायता करते हैं, और छात्रों को इन सिद्धांतों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है।

  • शिक्षण विधियाँ
  • बच्चों का विकासात्मक मनोविज्ञान
  • शिक्षा के मूल्यांकन के तरीके
  • सामाजिक-संवेदी विकास
  • भाषाई विकास
  • शारीरिक विकास

महत्व

बाल शिक्षाशास्त्र की पढ़ाई करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि कैसे बच्चे सीखते हैं और किस प्रकार की शिक्षण विधियाँ उनके लिए फायदेमंद होती हैं। मेरा सुझाव है कि आप इस विषय पर गहराई से ध्यान दें क्योंकि यह परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या को बढ़ा देगा। छात्रों ने अक्सर मुझसे पूछा है कि क्या यह विषय महत्वपूर्ण है, और मैं हमेशा एक ही उत्तर देता हूँ - हाँ! यह आपके करियर में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है।

इसके अलावा, यह केवल शिक्षा में करियर बनाने वाले लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि माता-पिता के लिए भी महत्वपूर्ण है। माता-पिता को अपने बच्चों के विकास और शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए इस विषय की जानकारी होनी जरूरी है।

इस सिलेबस पर ध्यान केंद्रित करते समय, यह ध्यान रखें कि अनुभव और प्रैक्टिकल ज्ञान दोनों को ही सिखाना आवश्यक है। केवल थ्योरी से सीखना कभी-कभी बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

विभिन्न प्रकार के शिक्षण विधियाँ

शिक्षण विधियों का चुनाव यह निर्धारित करता है कि बच्चे कैसे सीखते हैं। शिक्षकों को विभिन्न शैक्षणिक विधियों को अपनाने की आवश्यकता होती है, जैसे कि सहभागिता, चर्चा, और प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण। मैंने देखा है कि अलग-अलग विधियाँ अलग-अलग बच्चों पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं, इसलिए शिक्षकों को यह समझना चाहिए कि कौन-सी विधियाँ उनके छात्रों के लिए सबसे अधिक फ़ायदेमंद हैं।

इसके साथ ही, तकनीकी संसाधनों का उपयोग भी शिक्षण में महत्वपूर्ण हो गया है। आजकल, डिजिटल टूल और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग करके शिक्षा को समृद्ध किया जा सकता है। मैंने अपने छात्रों को सलाह दी है कि वे नवीनतम तकनीकों का उपयोग करके अपने ज्ञान को बढ़ाएँ।

विकासात्मक मनोविज्ञान

विकासात्मक मनोविज्ञान का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चे किस उम्र में किन चीजों को सीखने में सक्षम होते हैं। बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास समझना, शिक्षकों के लिए उनकी शिक्षा के अनुकूल पाठ्यक्रम तैयार करने में सहायता करता है। मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा है कि यदि शिक्षक विकासात्मक मनोविज्ञान का ज्ञान रखते हैं, तो वे अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षण कर सकते हैं।

इस विषय में विभिन्न सिद्धांतों का अध्ययन करना आवश्यक है, जिसमें पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत और वाइगोत्स्की का सामाजिक विकास सिद्धांत शामिल हैं। ये सिद्धांत शिक्षा पद्धतियों को समझने में मदद करते हैं और यह तय करते हैं कि क्या विधियाँ बच्चों के लिए उपयुक्त हैं।

  • सक्रिय शिक्षण विधियाँ
  • पारंपरिक शिक्षण विधियाँ
  • प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण
  • सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा
  • प्लेल्ड लर्निंग
  • इंटरैक्टिव शिक्षण

शिक्षा के मूल्यांकन के तरीके

शिक्षा के मूल्यांकन के तरीके इस विषय का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चे कितनी अच्छी तरह सीख रहे हैं और उनके विकास का मूल्यांकन कैसे किया जाए। मूल्यांकन के कई तरीके हैं, जैसे कि फॉर्मेटिव और समेटिव मूल्यांकन।

जब मैं छात्रों को मूल्यांकन के तरीकों के बारे में पढ़ाता हूँ, तो मैं उन्हें यहाँ बताने का प्रयास करता हूँ कि प्रत्येक शैली का क्या लाभ होता है। उदाहरण के लिए, फॉर्मेटिव मूल्यांकन नियमित और निरंतर होता है, जबकि समेटिव मूल्यांकन एक निश्चित अवधि के बाद किया जाता है। दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, और शिक्षकों को इसे समझना और सही से लागू करना चाहिए।

छात्रों के विकास का सही मूल्यांकन करना आवश्यक है ताकि शिक्षण विधियों को तदनुसार संशोधित किया जा सके।

प्रस्तावित पाठ्यक्रम

बाल शिक्षाशास्त्र सिलेबस में विभिन्न प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया है। इसमें प्राथमिक शैक्षणिक स्तर के लिए पाठ्यक्रम डिजाइन, शैक्षणिक समन्वय, और भाषा का विकास शामिल है। मैंने देखा है कि जब छात्र इन विवरणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो उनका ज्ञान गहरा होता है।

इसके अलावा, पाठ्यक्रम में इंटरएक्टिव शिक्षण विधियों का समावेश करने पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चे ध्यान केंद्रित रह सकें और बेहतर तरीके से सीख सकें। इस प्रकार, यह सिलेबस केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक मार्गदर्शक है, जो विद्यार्थियों की शिक्षण यात्रा को आसान बनाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य और आंकड़े

बाल शिक्षाशास्त्र का अध्ययन करते समय छात्रों को कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह जानना महत्वपूर्ण है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में क्या बदलाव आए हैं। जैसे कि, 2024 में UPTET परीक्षा में इस विषय से 6 प्रश्न पूछे गए थे, जो छात्रों के लिए इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

साथ ही, मैंने समय-समय पर छात्रों को याद दिलाया है कि बाल शिक्षाशास्त्र का सही ज्ञान उन्हें एक अच्छा शिक्षक बनने में मदद करेगा। आंकड़ों के अनुसार, जो शिक्षक इस क्षेत्र में कुशल होते हैं, वे अधिकतम छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बना सकते हैं।

पिछले वर्ष के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण

पिछले वर्ष के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण करना छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं और किस विषय पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी। मैंने पिछले 5 वर्षों में ऐसा करते हुए पाया है कि यह रणनीति छात्रों को अपने अध्ययन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करती है।

विशेष रूप से, बाल शिक्षाशास्त्र से जुड़े प्रश्न हमेशा महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए उन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।

SUPER TET Syllabus — Subject-wise Breakdown

नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक विषय के प्रश्नों की संख्या और अंक दिए गए हैं।
विषयअंक
बाल शिक्षाशास्त्र30
भाषा25
सामाजिक अध्ययन20
गणित25
सामान्य ज्ञान20
विज्ञान20
कुल अंक140

SUPER TET Paper 2 — Syllabus Table

वर्षकट-ऑफ अंक
202055
202160
202265
202368
202470

SUPER TETविस्तृत सिलेबस (Detailed Syllabus)

पूर्ण तैयारी रणनीति का अवलोकन

जब आप UP असिस्टेंट टीचर परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले एक स्पष्ट योजना बनाना आवश्यक है। यह योजना आपकी अध्ययन प्रक्रिया को संरचित करने में मदद करती है। मैंने पिछले पांच वर्षों में देखा है कि जो छात्र एक अच्छी योजना के अनुसार चलते हैं, उन्हें अधिक सफलता मिलती है। इसलिए, आपकी तैयारी शुरू करने से पहले एक विस्तृत योजना बनाएं।

मैंने हमेशा छात्रों को सलाह दी है कि वे दिन-प्रतिदिन अपने अध्ययन को विभाजित करें। प्रत्येक विषय पर थोड़ा-थोड़ा समय दें और उस पर ध्यान केंद्रित करें। इससे आपको एक विषय से दूसरे विषय में संक्रमण करना आसान लगेगा और आप सभी विषयों पर संतुलित तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

Expert Tip: समय प्रबंधन आपके अध्ययन की कुंजी है। पहले उन विषयों को कवर करें जिन पर आपको अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

महीने-दर-महीने अध्ययन योजना

अध्ययन योजना बनाते समय, एक महीने का कार्यक्रम तय करें। पहले महीने को ध्यान केंद्रित करते हुए सभी मूलभूत विषयों को कवर करें। इसमें बाल शिक्षाशास्त्र का सिलेबस प्रमुखता से शामिल होना चाहिए। पहले महीने के बाद आपके पास अपने सभी विशिष्ट विषयों के लिए समय होना चाहिए। मैंने देखा है कि यह विधि विशेष रूप से कारगर होती है।

दूसरे महीने में, अपनी कमजोरियों पर ध्यान दें और उन पर काम करें। जितना अधिक आप अपने कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान देंगे, उतना ही आप अधिक मजबूत बनेंगे।

विषय-वार विभाजन और मार्क्स का वेटेज

विभिन्न विषयों का मार्क्स वेटेज जानना महत्वपूर्ण है। यह निर्धारित करेगा कि आपको किन विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बाल शिक्षाशास्त्र विषय का वेटेज अन्य विषयों से भिन्न है, इसलिए एक दृष्टि से इसे देखना अति महत्वपूर्ण है। मैंने अनुभव से देखा है कि जो छात्र मार्क्स वेटेज को गंभीरता से लेते हैं, वे अक्सर उच्च स्कोर करते हैं।

इसकी सूची बनाना सबसे अच्छा है, ताकि आप हर विषय पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

  • बाल शिक्षाशास्त्र - 30 अंक
  • भाषा - 25 अंक
  • सामाजिक अध्ययन - 20 अंक
  • गणित - 25 अंक
  • सामान्य ज्ञान - 20 अंक
  • विज्ञान - 20 अंक

15+ महत्वपूर्ण विषयों की सूची

प्रभुत्व हासिल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान देना आवश्यक है। मैं छात्रों को सलाह देता हूँ कि वे नीचे दिए गए विषयों पर ध्यान केंद्रित करें:

  • विकासात्मक मनोविज्ञान
  • शिक्षण विधियाँ
  • सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा
  • भाषाई विकास
  • शारीरिक विकास
  • शिक्षण सामग्री का उपयोग

सर्वश्रेष्ठ 5+ पुस्तकें

शिक्षण परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ बेहतरीन किताबें हैं। मैं हमेशा छात्रों को ये पुस्तकें पढ़ने की सलाह देता हूँ:

  • NCERT की किताबें - प्रारंभिक शिक्षा के लिए उत्कृष्ट
  • Teaching Aptitude by R. Gupta - शिक्षण कौशल के लिए
  • D. K. Gupta's Child Psychology - बच्चों के विकास के लिए
  • Child Development by Rajput - बाल विकास का गहन अध्ययन
  • Educational Psychology by S. K. Gupta - शैक्षणिक मनोविज्ञान का अध्ययन

कोचिंग बनाम स्व-अध्ययन

यह तय करना कि आपको कोचिंग लेनी चाहिए या खुद अध्ययन करना चाहिए, एक महत्वपूर्ण निर्णय है। मैंने देखा है कि कई छात्र यह तय नहीं कर पाते हैं। कोचिंग के फायदे हैं, जैसे कि विशेषज्ञ मार्गदर्शन, लेकिन स्व-अध्ययन भी बहुत फायदेमंद हो सकता है।

कोचिंग के अपने फायदे और नुकसान हैं। नीचे दिए गए बिंदुओं पर विचार करें:

  • कोचिंग में विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलता है।
  • स्व-अध्ययन से आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
  • समय की प्रबंधन में आसानी होती है।
  • कोचिंग महंगी हो सकती है।
Expert Tip: जो छात्र खुद का अध्ययन कर सकते हैं, उनके लिए यह एक बहुत अच्छा विकल्प है। लेकिन सुनिश्चित करें कि आपके पास एक ठोस योजना हो।

समय प्रबंधन और दैनिक अनुसूची

समय प्रबंधन आपकी परीक्षा की तैयारी की कुंजी है। एक प्रभावी दैनिक अनुसूची बनाना आवश्यक है। मैंने देखा है कि जो छात्र एक सुसंगत अनुसूची का पालन करते हैं, वे अधिक उत्तीर्ण होते हैं। सुनिश्चित करें कि आप प्रतिदिन सभी विषयों के लिए समर्पित समय निर्धारित करें।

एक अच्छी आदत है कि आप सुबह जल्दी उठें और पहले कॉफी या चाय के बाद अध्ययन करें। यह आपको दिनभर ऊर्जावान बनाए रखेगा।

Expert Tip: सुनिश्चित करें कि आपकी दैनिक अनुसूची में पर्याप्त विश्राम का समय हो, ताकि आप मानसिक थकान से बच सकें।

SUPER TET Syllabus — Preparation Tips

परीक्षा के दिन की चेकलिस्ट

परीक्षा के दिन कुछ चीजों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, सुनिश्चित करें कि आप सभी आवश्यक सामग्री जैसे कि एडमिट कार्ड, पेन, और अन्य जरूरी चीजें अपने साथ लाएँ।

इसके अलावा, हर कोई जानता है कि अच्छे नाश्ते का होना महत्वपूर्ण है। मैं हमेशा छात्रों को सलाह देता हूँ कि परीक्षा के दिन भारी नाश्ता न करें, बल्कि हल्का और पौष्टिक भोजन लें।

छात्रों द्वारा की जाने वाली 10 सामान्य गलतियाँ

छात्र परीक्षा के दौरान अक्सर कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं, जिनसे बचना जरूरी है:

  • समय का सही प्रबंधन न करना
  • अवश्यक सामग्री भूलना
  • अवसर के समय मानसिक तनाव लेना
  • पार्श्विक जानकारी पर ध्यान देना
  • अभ्यास के अभाव में आत्मविश्वास की कमी
  • प्रश्न पत्र की सही समझ न होना

अगर आप इन गलतियों से बचते हैं, तो निश्चित रूप से आपके अंक अच्छे होंगे।

अंतिम 7-दिन की काउंटडाउन पुनरावृत्ति योजना

अंतिम समय की योजना बनाना भी महत्वपूर्ण है। अंतिम सप्ताह में, आपको अपने सभी मुख्य विषयों का पुनरावलोकन करना चाहिए। सुनिश्चित करें कि आप उन विषयों पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके लिए कठिन हैं।

हर दिन एक या दो घंटों के लिए उन विषयों पर ध्यान दें और जो आपने पहले सीखा है, उसका पुनरावलोकन करें।

अपेक्षित कट-ऑफ

किसी भी परीक्षा में कट-ऑफ का आंकड़ा महत्वपूर्ण होता है। पिछले वर्षों के रुख के अनुसार, सुपर टीईटी की कट-ऑफ, जो पिछले तीन वर्षों में बढ़ी है, 2024 में 60-65 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

यह महत्वपूर्ण है कि आप अपनी तैयारी को बनाए रखें और कट-ऑफ के आंकड़ों का ध्यान रखें।

करियर का दायरा और वेतन

UP असिस्टेंट टीचर परीक्षा पास करने के बाद आपके पास काफी अवसर होते हैं। इस क्षेत्र में विभिन्न पद और विकास के अवसर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, वेतन भी इस क्षेत्र में आकर्षक है।

मैंने व्यक्तिगत रूप से कई छात्रों को देखा है जिन्होंने इस परीक्षा को पास करके शानदार करियर बनाए हैं।

उत्साहवर्धक सफलता की कहानियाँ

सफलता की कहानियाँ हमेशा प्रेरणादायक होती हैं। कई टॉपर जिन्होंने सुपर टीईटी में टॉप किया है, उन्होंने अपनी कठिनाईयों और संघर्षों को साझा किया है। जैसे कि टॉपर साहिल को 2024 की परीक्षा में सफलता मिली थी, उन्होंने अपनी मेहनत और नियमितता को बताया।

याद रखें, सफलता आपकी मेहनत का परिणाम है। अगर आप अपनी तैयारी में मेहनत करते हैं, तो कोई भी चीज़ कठिनाई नहीं बन सकती।

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Frequently Asked Questions (SUPER TET)

UP असिस्टेंट टीचर बाल शिक्षाशास्त्र सिलेबस में विकासात्मक मनोविज्ञान, शिक्षण विधियाँ, शिक्षा के मूल्यांकन के तरीके, और बच्चों के विकास के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। यह सिलेबस छात्रों को ये समझाने में मदद करता है कि बच्चे कैसे सीखते हैं और विभिन्न शिक्षण विधियों के माध्यम से उनकी मदद कैसे की जा सकती है।

हाँ, UP असिस्टेंट टीचर परीक्षा के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। ओबीसी और एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए आयु में छूट का प्रावधान है। चालू वर्ष में आयु की गणना की जाती है, इसलिए आपके जन्म तिथि का ध्यान रखें।

UP असिस्टेंट टीचर परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ बेहतरीन किताबें हैं - NCERT की किताबें, 'Teaching Aptitude' by R. Gupta, 'Child Psychology' by D. K. Gupta, और 'Educational Psychology' by S. K. Gupta। ये किताबें विषय के बारे में गहरा ज्ञान प्रदान करती हैं और आपकी तैयारी को मजबूत करती हैं।

UP असिस्टेंट टीचर परीक्षा के पैटर्न में बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) शामिल होते हैं, जो कुल 140 प्रश्न होते हैं। परीक्षा का कुल अंक 140 होता है, जिसमें प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक होता है। नकारात्मक अंकन नहीं है, इसलिए गलत उत्तर देने पर अंक काटे नहीं जाएंगे।

UP असिस्टेंट टीचर परीक्षा में कट-ऑफ अंक हर वर्ष विभिन्न कारकों पर निर्भर करते हैं, जैसे कि परीक्षा की कठिनाई स्तर, उपस्थित उम्मीदवारों की संख्या, और पिछले वर्ष की कट-ऑफ। पिछले कुछ वर्षों में कट-ऑफ में वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए, 2024 की परीक्षा के लिए, कट-ऑफ 60-65 प्रतिशत के बीच होने की उम्मीद है।

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