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Mock Tests 2026

Super TET Science: मिश्रणों को अलग करने की विधियाँ (Methods of Separating Mixtures) - विस्तृत गाइड 2026

Super TET Science में मिश्रणों को अलग करने की विधियाँ: आपकी सफलता की कुंजी! Learn Methods of Separating Mixtures for Super TET Science: Your Key to Success!

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Author

Yadvendra Singh Pal

Founder & Director,Unictest. M.Sc (Maths), MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET, KVS, DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.Founder & Director Unictest. M.Sc (Maths) MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET KVS DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.

Updated: 2026-06-19 · हिंदी

SUPER TET Mock Test Series — Overview

नमस्ते मेरे प्यारे Super TET aspirants! आज हम विज्ञान के एक बेहद महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक पर बात करने जा रहे हैं - 'मिश्रणों को अलग करने की विधियाँ' (Methods of Separating Mixtures). Super TET की Science सेक्शन में इस टॉपिक से अक्सर 2-3 सवाल सीधे तौर पर पूछ लिए जाते हैं, और यकीन मानिए, ये बहुत आसान होते हैं अगर कॉन्सेप्ट क्लियर हों। मैं Yadvendra Singh Pal, Unictest की टीम से, आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इस गाइड को पढ़ने के बाद आपके सारे डाउट्स क्लियर हो जाएंगे और आप इन सवालों को चुटकियों में हल कर पाएंगे।


देखो दोस्तों, हमारे आस-पास की दुनिया में सब कुछ शुद्ध रूप में नहीं मिलता। ज्यादातर चीजें मिश्रण (Mixtures) के रूप में होती हैं। जैसे, चीनी और पानी का घोल, हवा, दूध, मिट्टी – ये सब मिश्रण हैं। लेकिन कई बार हमें इन मिश्रणों से उनके घटकों को अलग करना पड़ता है, चाहे वो शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए हो या किसी अशुद्धता को हटाने के लिए। यहीं पर काम आती हैं मिश्रणों को अलग करने की विभिन्न विधियाँ।


सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि मिश्रण क्या होते हैं और कितने प्रकार के होते हैं:


मिश्रण (Mixtures) क्या हैं?


जब दो या दो से अधिक पदार्थ बिना किसी रासायनिक अभिक्रिया के आपस में मिलते हैं, तो उसे मिश्रण कहते हैं। मिश्रण में पदार्थ अपनी मूल पहचान बनाए रखते हैं और उन्हें भौतिक विधियों से अलग किया जा सकता है।


मिश्रणों के प्रकार (Types of Mixtures):


  • समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture): ऐसे मिश्रण जिनमें घटक पूरी तरह से एक-दूसरे में घुल जाते हैं और पूरे मिश्रण में एक समान संरचना होती है। आप उनके घटकों को अलग-अलग नहीं देख सकते। जैसे, चीनी और पानी का घोल, हवा।
  • विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture): ऐसे मिश्रण जिनमें घटक एक-दूसरे में पूरी तरह से नहीं घुलते और पूरे मिश्रण में उनकी संरचना एक समान नहीं होती। आप उनके घटकों को अलग-अलग देख सकते हैं। जैसे, रेत और पानी का मिश्रण, तेल और पानी का मिश्रण।

यह बेसिक कॉन्सेप्ट समझना बहुत जरूरी है क्योंकि अलग-अलग प्रकार के मिश्रणों को अलग करने के लिए अलग-अलग विधियों का उपयोग किया जाता है। मेरे पिछले 5 सालों के अनुभव में, मैंने देखा है कि कई छात्र यहीं पर गलती करते हैं – उन्हें पता ही नहीं होता कि किस मिश्रण के लिए कौन सी विधि उपयुक्त है।


मिश्रणों को अलग करने की सामान्य भौतिक विधियाँ (Common Physical Methods of Separation):


चलो, अब एक-एक करके इन विधियों को समझते हैं। ये वो विधियाँ हैं जिन्हें हम अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में भी देखते हैं और Super TET में इनसे सीधे सवाल बनते हैं।


1. हाथ से चुनना (Hand-picking):


यह सबसे सरल विधि है। जब मिश्रण के घटकों का आकार, रंग या बनावट अलग-अलग होती है और वे पर्याप्त मात्रा में होते हैं, तो उन्हें हाथ से चुनकर अलग किया जा सकता है।


उदाहरण: दाल या चावल से कंकड़, पत्थर या मिट्टी के कणों को अलग करना। अनाज से भूसी को अलग करना।

2. थ्रेशिंग (Threshing):


काटे गए फसल के पौधों से अनाज के दानों को अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं। यह डंडों से पीटकर या मशीनों (थ्रेशर) का उपयोग करके की जाती है।


उदाहरण: गेहूं, धान या बाजरे के दानों को उनकी बालियों से अलग करना।

3. निष्पादन या ओसाना (Winnowing):


इस विधि का उपयोग भारी और हल्के घटकों को हवा की मदद से अलग करने के लिए किया जाता है। किसान अक्सर अनाज से भूसे जैसी हल्की अशुद्धियों को अलग करने के लिए इस विधि का उपयोग करते हैं।


उदाहरण: गेहूं से भूसी को अलग करना। हल्की सूखी पत्तियों को भारी बीजों से अलग करना।

4. चालन या छानना (Sieving):


जब मिश्रण के घटकों का आकार अलग-अलग होता है, तो उन्हें चालनी (sieve) का उपयोग करके अलग किया जाता है। छोटे कण चालनी से निकल जाते हैं, जबकि बड़े कण ऊपर रह जाते हैं।


उदाहरण: आटे से चोकर अलग करना, रेत से कंकड़ अलग करना, कंस्ट्रक्शन साइट पर बजरी छानना।

5. अवसादन, निस्तारण और निस्यंदन (Sedimentation, Decantation & Filtration):


ये विधियाँ मुख्य रूप से द्रव और उसमें अघुलनशील ठोस कणों को अलग करने के लिए उपयोग की जाती हैं।


  • अवसादन (Sedimentation): जब किसी द्रव में अघुलनशील भारी ठोस कण मौजूद हों, तो उन्हें कुछ समय के लिए शांत छोड़ दिया जाता है। भारी कण नीचे बैठ जाते हैं।
  • निस्तारण (Decantation): अवसादन के बाद, ऊपर के साफ द्रव को सावधानी से दूसरे पात्र में उड़ेल लिया जाता है, जबकि नीचे बैठे ठोस को डिस्टर्ब नहीं किया जाता।
  • निस्यंदन (Filtration): इस विधि में एक फिल्टर पेपर या फिल्टर माध्यम का उपयोग करके द्रव में निलंबित (suspended) ठोस कणों को अलग किया जाता है। द्रव फिल्टर पेपर से निकल जाता है (फिल्ट्रेट), जबकि ठोस कण फिल्टर पेपर पर रह जाते हैं (अवशेष)।

उदाहरण: गंदे पानी से मिट्टी को अलग करना (अवसादन और निस्तारण), चाय की पत्तियों को चाय से अलग करना (निस्यंदन), पनीर बनाने में दूध से पानी अलग करना।

मैंने कई बार देखा है कि Super TET में इन विधियों के उदाहरण देकर पूछा जाता है कि यह कौन सी विधि है। इसलिए हर विधि का उदाहरण ध्यान से याद रखना।


Super TET Science Mock Question:


Q. निम्नलिखित में से कौन सी विधि पानी में घुली हुई चीनी को अलग करने के लिए सबसे उपयुक्त नहीं है?
  • A) वाष्पीकरण (Evaporation)
  • B) क्रिस्टलीकरण (Crystallization)
  • C) निस्तारण (Decantation)
  • D) आसवन (Distillation)
Answer: C) निस्तारण (Decantation)

इस सवाल का जवाब 'निस्तारण' है क्योंकि चीनी पानी में घुल जाती है, भारी होकर नीचे नहीं बैठती। इसलिए निस्तारण विधि काम नहीं आएगी। वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण या आसवन से इसे अलग किया जा सकता है। यह दिखाता है कि आपको हर विधि की सीमाएं भी पता होनी चाहिए।


महत्वपूर्ण चेतावनी: Super TET में Science सेक्शन में कॉन्सेप्चुअल क्लैरिटी बहुत जरूरी है। केवल रटने से काम नहीं चलेगा। हर विधि के पीछे का वैज्ञानिक कारण और उसके अनुप्रयोगों को समझो।

इस सेक्शन में हमने कुछ बेसिक लेकिन बहुत महत्वपूर्ण विधियों को कवर किया है। अगले सेक्शन में हम कुछ और एडवांस और वैज्ञानिक विधियों पर चर्चा करेंगे जो Super TET के लिए उतनी ही जरूरी हैं। अपनी नोटबुक में इन पॉइंट्स को नोट करते रहना, क्योंकि यही आपकी तैयारी का आधार बनेंगे!

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Test Series Features

चलो दोस्तों, अब हम मिश्रणों को अलग करने की कुछ और वैज्ञानिक और थोड़ी जटिल विधियों पर गौर करते हैं जो Super TET Science में आपके मार्क्स बढ़ा सकती हैं। ये विधियाँ अक्सर उन मिश्रणों के लिए उपयोग की जाती हैं जहाँ घटक बहुत बारीक होते हैं या एक-दूसरे में घुले हुए होते हैं।


मिश्रणों को अलग करने की उन्नत विधियाँ (Advanced Methods of Separation):


1. वाष्पीकरण (Evaporation):


इस विधि का उपयोग किसी विलायक (solvent) में घुले हुए वाष्पशील (volatile) ठोस पदार्थ को अलग करने के लिए किया जाता है। द्रव को गर्म करके या खुली हवा में रखकर वाष्पित किया जाता है, जिससे ठोस पदार्थ पात्र में रह जाता है।


उदाहरण: नमक के घोल से नमक प्राप्त करना, स्याही से रंगीन घटक प्राप्त करना।

2. आसवन (Distillation):


आसवन विधि का उपयोग दो या दो से अधिक ऐसे द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है जिनके क्वथनांक (boiling points) में पर्याप्त अंतर होता है, या किसी द्रव में घुले हुए अवाष्पशील (non-volatile) ठोस को अलग करने के लिए किया जाता है। इसमें द्रव को गर्म करके वाष्प में बदला जाता है, फिर उस वाष्प को ठंडा करके वापस द्रव में संघनित (condense) किया जाता है।


  • साधारण आसवन (Simple Distillation): जब दो द्रवों के क्वथनांक में 25°C से अधिक का अंतर हो। या द्रव से अवाष्पशील ठोस अशुद्धियों को अलग करना हो।
  • प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation): जब दो या दो से अधिक द्रवों के क्वथनांक में 25°C से कम का अंतर हो।

उदाहरण: पानी से नमक को अलग करना (साधारण आसवन), कच्चे तेल से पेट्रोल, डीजल आदि को अलग करना (प्रभाजी आसवन), हवा से ऑक्सीजन और नाइट्रोजन को अलग करना (प्रभाजी आसवन)।

3. पृथक्करण कीप (Separating Funnel) का उपयोग:


यह विधि उन अमिश्रणीय (immiscible) द्रवों को अलग करने के लिए उपयोग की जाती है जो एक-दूसरे में नहीं घुलते और अलग-अलग परतें बनाते हैं (घनत्व के अंतर के कारण)।


उदाहरण: तेल और पानी का मिश्रण, पेट्रोल और पानी का मिश्रण।

4. ऊर्ध्वपातन (Sublimation):


कुछ ठोस पदार्थ ऐसे होते हैं जो गर्म करने पर सीधे ठोस से गैस में बदल जाते हैं (बिना द्रव अवस्था में आए)। इस गुण का उपयोग करके ऐसे ठोस को अन्य ठोस अशुद्धियों से अलग किया जा सकता है जो ऊर्ध्वपातित नहीं होते।


उदाहरण: कपूर, नेफ़थलीन, अमोनियम क्लोराइड, आयोडीन को रेत या नमक के मिश्रण से अलग करना।

5. क्रोमेटोग्राफी (Chromatography):


यह एक बहुत ही शक्तिशाली विधि है जिसका उपयोग उन घटकों को अलग करने के लिए किया जाता है जो एक ही विलायक में घुले होते हैं लेकिन उनकी घुलनशीलता अलग-अलग होती है। पेपर क्रोमेटोग्राफी इसका एक सामान्य प्रकार है।


उदाहरण: स्याही में मौजूद विभिन्न रंगों को अलग करना, रक्त से नशीले पदार्थों को अलग करना, पौधों से पिगमेंट को अलग करना।

6. अपकेंद्रण (Centrifugation):


इस विधि में, मिश्रण को बहुत तेज़ी से घुमाया जाता है, जिससे भारी कण केंद्र से दूर बाहर की ओर चले जाते हैं और हल्के कण केंद्र के पास रहते हैं। यह विधि उन कणों को अलग करने के लिए उपयोगी है जो फिल्टर पेपर से भी निकल जाते हैं।


उदाहरण: दूध से क्रीम अलग करना, वॉशिंग मशीन में गीले कपड़ों से पानी निकालना, रक्त और मूत्र परीक्षण में।

7. चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic Separation):


यदि मिश्रण में एक घटक चुंबकीय गुण रखता है और दूसरा नहीं, तो चुंबक का उपयोग करके उन्हें अलग किया जा सकता है।


उदाहरण: लोहे के बुरादे को रेत या सल्फर के मिश्रण से अलग करना।

Expert Tip: Super TET में अक्सर इन विधियों के वैज्ञानिक नाम और उनके उदाहरणों पर आधारित सवाल आते हैं। 'किस विधि का उपयोग किस तरह के मिश्रण के लिए किया जाता है?' यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है। एक फ्लोचार्ट बनाकर सभी विधियों और उनके अनुप्रयोगों को एक जगह लिख लो – यह रिवीजन में बहुत हेल्प करेगा।

Super TET Science की तैयारी की रणनीति (Preparation Strategy for Super TET Science):


अब जब हमने सभी महत्वपूर्ण विधियों को समझ लिया है, तो बात करते हैं कि Super TET Science में आप इस टॉपिक और पूरे Science सेक्शन को कैसे तैयार करें।


1. सिलेबस को समझें (Understand the Syllabus):


सबसे पहले, Super TET Science के पूरे सिलेबस को ध्यान से पढ़ें। 'मैटर' और 'सेपरेशन ऑफ मिक्सचर्स' इसका एक अभिन्न अंग है। NCERT की कक्षा 6 से 10 तक की विज्ञान की किताबों को अपना आधार बनाएं। मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है कि Super TET के 80% सवाल सीधे NCERT से आते हैं।


2. कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर जोर (Focus on Concept Clarity):


रटने की बजाय हर कॉन्सेप्ट को समझने की कोशिश करें। 'क्यों' और 'कैसे' पर ध्यान दें। उदाहरण के लिए, आसवन और प्रभाजी आसवन में क्या अंतर है और उनका उपयोग कब किया जाता है।


3. नोट्स बनाएं (Make Notes):


अपने खुद के शॉर्ट और क्रिस्प नोट्स बनाएं। हर विधि का नाम, उसकी परिभाषा, सिद्धांत और कम से कम दो उदाहरण जरूर लिखें। फ्लोचार्ट्स और डायग्राम्स का उपयोग करें। यह रिवीजन के समय बहुत काम आते हैं।


4. पिछले वर्षों के प्रश्न हल करें (Solve Previous Year Papers):


Super TET और अन्य TET एग्जाम्स (CTET, UPTET, JTET) के पिछले 5-7 सालों के Science सेक्शन के प्रश्न हल करें। इससे आपको प्रश्नों का पैटर्न और महत्वपूर्ण टॉपिक्स का अंदाजा होगा। मैंने देखा है कि कई बार प्रश्न सीधे रिपीट भी हो जाते हैं या उन्हीं कॉन्सेप्ट्स पर आधारित होते हैं।


5. मॉक टेस्ट दें (Attempt Mock Tests):


Unictest पर उपलब्ध Super TET Science के मॉक टेस्ट जरूर दें। मॉक टेस्ट आपको समय प्रबंधन (time management) और परीक्षा के माहौल में प्रदर्शन करने में मदद करते हैं। अपनी गलतियों का विश्लेषण करें और उन पर काम करें।


Super TET Science Mock Question (Advanced):


Q. कच्चे तेल (Crude Oil) से पेट्रोल और डीजल जैसे विभिन्न घटकों को अलग करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
  • A) साधारण आसवन (Simple Distillation)
  • B) प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)
  • C) अपकेंद्रण (Centrifugation)
  • D) ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
Answer: B) प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)

इस सवाल का जवाब प्रभाजी आसवन है क्योंकि कच्चे तेल के विभिन्न घटकों (जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन) के क्वथनांक में बहुत कम अंतर होता है, और उन्हें अलग करने के लिए इस विशेष विधि की आवश्यकता होती है। यह एक क्लासिक उदाहरण है जो अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।


याद रखिए दोस्तों, Super TET सिर्फ एक परीक्षा नहीं, आपके सपनों की उड़ान है। एक सरकारी शिक्षक बनने का सपना तभी पूरा होगा जब आपकी तैयारी मजबूत और सटीक होगी। Science एक ऐसा विषय है जहाँ आप पूरे मार्क्स स्कोर कर सकते हैं अगर आपके कॉन्सेप्ट्स क्लियर हों। तो बिना किसी देरी के, आज से ही अपनी तैयारी को एक नई दिशा दें!

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Frequently Asked Questions (SUPER TET)

Super TET Science में 'मिश्रणों को अलग करने की विधियाँ' एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है क्योंकि इससे सीधे तौर पर 2-3 प्रश्न पूछे जाते हैं। ये प्रश्न अक्सर विधियों के नाम, उनके सिद्धांतों या वास्तविक जीवन के उदाहरणों पर आधारित होते हैं। इस टॉपिक पर अच्छी पकड़ आपको Science सेक्शन में अच्छे अंक दिलाने में मदद करती है, जिससे आपकी मेरिट लिस्ट में आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, एक शिक्षक के रूप में बच्चों को विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझाने के लिए भी यह ज्ञान आवश्यक है।

Super TET Science की तैयारी के लिए सबसे पहले NCERT की कक्षा 6 से 10 तक की विज्ञान की किताबों को अपना आधार बनाएं। इन किताबों में दिए गए कॉन्सेप्ट्स और उदाहरणों को ध्यान से पढ़ें और समझें। इसके बाद, पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करें ताकि आपको परीक्षा पैटर्न और महत्वपूर्ण टॉपिक्स का अंदाजा हो सके। Unictest जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध मॉक टेस्ट और स्टडी मटेरियल का भी उपयोग करें। अपने खुद के शॉर्ट नोट्स बनाना और नियमित रिवीजन करना भी बहुत फायदेमंद होता है।

मिश्रणों को अलग करने की कई विधियाँ हैं, जैसे हाथ से चुनना (दाल से कंकड़), निष्पादन (अनाज से भूसी), चालन (आटे से चोकर), अवसादन/निस्तारण/निस्यंदन (गंदे पानी से मिट्टी), वाष्पीकरण (नमक के घोल से नमक), आसवन (पानी से नमक, कच्चे तेल से पेट्रोल), पृथक्करण कीप (तेल और पानी), ऊर्ध्वपातन (कपूर से अशुद्धियाँ), क्रोमेटोग्राफी (स्याही के रंग), अपकेंद्रण (दूध से क्रीम), और चुंबकीय पृथक्करण (लोहे का बुरादा)। प्रत्येक विधि का उपयोग मिश्रण के घटकों के भौतिक गुणों (जैसे आकार, घनत्व, क्वथनांक, घुलनशीलता, चुंबकीय गुण) में अंतर के आधार पर किया जाता है।

समांगी मिश्रण वह होता है जिसमें घटक पूरी तरह से घुल जाते हैं और पूरे मिश्रण में एक समान संरचना होती है (जैसे चीनी-पानी का घोल)। इन्हें अलग करने के लिए वाष्पीकरण, आसवन, क्रिस्टलीकरण या क्रोमेटोग्राफी जैसी विधियाँ उपयोग की जाती हैं। विषमांगी मिश्रण वह होता है जिसमें घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं और एक समान संरचना नहीं होती (जैसे रेत-पानी का मिश्रण)। इन्हें अलग करने के लिए हाथ से चुनना, थ्रेशिंग, निष्पादन, चालन, अवसादन, निस्तारण, निस्यंदन, चुंबकीय पृथक्करण या पृथक्करण कीप जैसी भौतिक विधियाँ अधिक उपयुक्त होती हैं।

Science सेक्शन में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर सबसे ज्यादा जोर दें। हर टॉपिक को रटने की बजाय समझें और उसके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को जानें। NCERT की पुस्तकों से बेस मजबूत करें और महत्वपूर्ण परिभाषाओं, सूत्रों और उदाहरणों के नोट्स बनाएं। नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें और अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करें ताकि कमजोर क्षेत्रों की पहचान हो सके। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आपको प्रश्नों के प्रकार और कठिनाई स्तर का पता चलता है। आत्मविश्वास बनाए रखें और निरंतर अभ्यास करें।

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