Unictest Team
Updated: 2026-05-12 · English
भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए मेडिकल फिटनेस, विशेषकर कलर विजन, अत्यंत महत्वपूर्ण है। RRB ALP 2026 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को Shilling Test और Ishihara Plate Reading जैसे कलर ब्लाइंडनेस टेस्ट को समझना और उसके लिए तैयार रहना चाहिए। यह सेक्शन आपको इन परीक्षणों की गहराई से जानकारी देगा ताकि आप अपनी मेडिकल परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार रहें।
कलर विजन टेस्ट का महत्व (Importance of Color Vision Test)
रेलवे परिचालन में सुरक्षा सर्वोपरि है, और लोको पायलट को सिग्नल, ट्रैक मार्कर और अन्य सुरक्षा-संबंधित रंगों को सटीक रूप से पहचानने की आवश्यकता होती है। कलर ब्लाइंडनेस या रंग भेद न कर पाना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए, RRB ALP मेडिकल परीक्षा में कलर विजन की जांच एक अनिवार्य और निर्णायक चरण है। उम्मीदवारों को यह समझना होगा कि यदि वे कलर ब्लाइंडनेस के किसी भी रूप से प्रभावित होते हैं, तो वे ALP जैसे पदों के लिए अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।
इशिहारा प्लेट टेस्ट (Ishihara Plate Test) क्या है?
इशिहारा प्लेट टेस्ट कलर ब्लाइंडनेस का पता लगाने के लिए सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले परीक्षणों में से एक है। इसे जापानी नेत्र रोग विशेषज्ञ शिनोबु इशिहारा ने विकसित किया था। इस टेस्ट में रंगीन डॉट्स से बनी प्लेटों की एक श्रृंखला होती है, जिसमें एक संख्या या पैटर्न छिपा होता है। सामान्य रंग दृष्टि वाला व्यक्ति इन संख्याओं या पैटर्न को आसानी से पहचान सकता है, जबकि कलर ब्लाइंड व्यक्ति को इन्हें पहचानने में कठिनाई होती है या वे कुछ और ही देखते हैं।
- कैसे किया जाता है: उम्मीदवार को लगभग 75 सेंटीमीटर (30 इंच) की दूरी पर इशिहारा प्लेट बुक दिखाई जाती है। उन्हें प्रत्येक प्लेट पर दिखाई गई संख्या या पैटर्न को 3 सेकंड के भीतर पहचानना होता है।
- प्लेटों के प्रकार: इसमें विभिन्न प्रकार की प्लेटें होती हैं, जिनमें वैनिशिंग टाइप (लुप्त होने वाली), ट्रांसफॉर्मेशन टाइप (परिवर्तन), हिडन डिजिट टाइप (छिपी हुई संख्या), और डायग्नोस्टिक टाइप (निदान) शामिल हैं।
- परिणाम की व्याख्या: परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उम्मीदवार कितनी प्लेटों को सही ढंग से पढ़ पाता है। रेलवे में A1 मेडिकल स्टैंडर्ड के लिए, उम्मीदवारों को बिना किसी त्रुटि के सभी प्लेटों को सही ढंग से पढ़ना होता है।
शिलिंग टेस्ट (Shilling Test) क्या है और इसकी रेलवे में भूमिका?
भारतीय रेलवे में 'शिलिंग टेस्ट' शब्द का उपयोग कभी-कभी कलर विजन के लिए किए जाने वाले लैंटर्न टेस्ट या सिग्नल कलर टेस्ट के संदर्भ में किया जाता है। जबकि इशिहारा प्लेट टेस्ट मुख्य रूप से लाल-हरे रंग की कमी (Red-Green Color Deficiency) का पता लगाता है, शिलिंग टेस्ट या लैंटर्न टेस्ट अधिक व्यावहारिक और क्रियात्मक होता है। इसमें उम्मीदवार को विभिन्न दूरियों और प्रकाश की स्थितियों में लाल, हरे और सफेद जैसे विभिन्न रंगों की रोशनी (जैसे रेलवे सिग्नल) की पहचान करनी होती है।
- उद्देश्य: यह परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि उम्मीदवार वास्तविक परिचालन स्थितियों में रेलवे सिग्नलों के रंगों को सही ढंग से पहचान सकें।
- प्रक्रिया: आमतौर पर, एक विशेष लालटेन (lantern) का उपयोग किया जाता है जो विभिन्न रंगों की रोशनी उत्सर्जित करता है। उम्मीदवार को कुछ दूरी से इन रंगों को सही ढंग से बताना होता है।
- इशिहारा से अंतर: इशिहारा एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जबकि शिलिंग/लैंटर्न टेस्ट अधिक व्यावहारिक अनुप्रयोग पर केंद्रित है, खासकर उन स्थितियों के लिए जहां रंग की पहचान सीधे सुरक्षा से जुड़ी होती है। रेलवे में दोनों टेस्ट का संयोजन उम्मीदवारों की कलर विजन क्षमता का पूरी तरह से मूल्यांकन करता है।