Unictest Team
Updated: 2026-05-06 · 8 min read
भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) और तकनीशियन (Technician) दोनों ही बेहद आकर्षक पद हैं। इन दोनों पदों के लिए हर साल लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं, खासकर RRB ALP/Technician 2026 जैसी बड़ी भर्ती परीक्षाओं में। लेकिन, अक्सर छात्रों के मन में यह सवाल उठता है कि वेतन, भत्ते और करियर ग्रोथ के मामले में कौन सा पद बेहतर है? इस विस्तृत गाइड में, हम ALP और तकनीशियन के वेतन, जॉब प्रोफाइल, भत्तों और करियर संभावनाओं का गहन विश्लेषण करेंगे ताकि आप अपने लिए सही करियर पथ चुन सकें।
रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा आयोजित ALP और तकनीशियन परीक्षाएं देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक हैं। दोनों ही पद 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत आते हैं, लेकिन उनकी कार्य प्रकृति, जिम्मेदारियों और पोस्टिंग के स्थानों के कारण उनके वेतनमान और मिलने वाले भत्तों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। आइए, इन अंतरों को विस्तार से समझते हैं।
ALP और तकनीशियन का मूल वेतन (Basic Pay) और पे लेवल
ALP और तकनीशियन दोनों ही पदों का मूल वेतन 7वें वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स लेवल 2 के अंतर्गत आता है। इसका मतलब है कि दोनों का मूल वेतन ₹19,900 प्रति माह से शुरू होता है। हालांकि, यह केवल मूल वेतन है। इसमें विभिन्न भत्ते और कटौतियां जुड़ने के बाद कुल वेतन (Gross Salary) और हाथ में आने वाला वेतन (In-hand Salary) काफी अलग हो जाता है।
- असिस्टेंट लोको पायलट (ALP): ALP का मुख्य कार्य ट्रेन चलाना होता है, जिसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण और जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इनकी ड्यूटी अक्सर 'Running Staff' के रूप में होती है, जिससे इन्हें कुछ अतिरिक्त भत्ते मिलते हैं।
- तकनीशियन (Technician): तकनीशियन विभिन्न तकनीकी विभागों जैसे इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिग्नल और टेलीकॉम आदि में रखरखाव और मरम्मत का कार्य करते हैं। इनका कार्य स्थिर होता है और इन्हें 'Workshop Staff' या 'Station Staff' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
वेतन में अंतर लाने वाले प्रमुख भत्ते (Allowances)
मूल वेतन समान होने के बावजूद, विभिन्न भत्ते ही ALP और तकनीशियन के कुल वेतन में अंतर पैदा करते हैं। भारतीय रेलवे में मिलने वाले कुछ प्रमुख भत्ते इस प्रकार हैं:
- महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA): यह केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर संशोधित किया जाता है और मूल वेतन का एक निश्चित प्रतिशत होता है। यह ALP और तकनीशियन दोनों को समान रूप से मिलता है।
- मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance - HRA): यह पोस्टिंग शहर की श्रेणी (X, Y, Z) के अनुसार मूल वेतन का 27%, 18% या 9% होता है। यह भी दोनों को समान रूप से मिलता है, बशर्ते उन्हें रेलवे क्वार्टर न मिला हो।
- यात्रा भत्ता (Transport Allowance - TA): यह भी पोस्टिंग स्थान के आधार पर भिन्न होता है।
- नाइट ड्यूटी भत्ता (Night Duty Allowance - NDA): ALP को अक्सर नाइट ड्यूटी करनी पड़ती है, जिसके लिए उन्हें यह भत्ता मिलता है। तकनीशियनों को यह तभी मिलता है जब उनकी ड्यूटी रात में हो।
- रनिंग भत्ता (Running Allowance): यह ALP के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण भत्ता है। ट्रेन चलाने के दौरान तय की गई प्रति किलोमीटर दूरी के आधार पर उन्हें यह भत्ता मिलता है। यह ALP के वेतन को तकनीशियन से काफी अधिक बना देता है। तकनीशियनों को यह भत्ता नहीं मिलता।
- ओवरटाइम भत्ता (Overtime Allowance - OTA): यदि ALP या तकनीशियन अपने निर्धारित घंटों से अधिक काम करते हैं, तो उन्हें OTA मिलता है। ALP को अक्सर लंबे घंटों तक काम करना पड़ता है, जिससे उन्हें OTA मिलने की संभावना अधिक होती है।
- अन्य भत्ते: इनमें ड्रेस अलाउंस, रिस्क अलाउंस (कुछ तकनीकी पदों के लिए), हॉलिडे पैकेज आदि शामिल हो सकते हैं।
इन भत्तों को ध्यान में रखते हुए, एक असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) का शुरुआती इन-हैंड सैलरी ₹35,000 से ₹45,000 प्रति माह तक हो सकता है, जबकि एक तकनीशियन का शुरुआती इन-हैंड सैलरी ₹30,000 से ₹40,000 प्रति माह तक हो सकता है। यह अंतर अनुभव और पोस्टिंग शहर के साथ और बढ़ सकता है। RRB ALP 2026 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को इन सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए।