Unictest FREE APP Download Unictest App — Free Mock Tests, PYQs & Notes for 375+ Exams! Unictest App — Free Mock Tests & PYQs! Get it on Google Play
Study Notes

Powers of Governor and High Court in Jharkhand (JH) for JTET Exam 2026 | झारखंड में राज्यपाल और उच्च न्यायालय की शक्तियाँ JTET परीक्षा के लिए

Unraveling the Constitutional Powers: Governor and High Court in Jharkhand for JTET Exam 2026 | संवैधानिक शक्तियों को समझें: झारखंड में राज्यपाल और उच्च न्यायालय JTET परीक्षा 2026 के लिए

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-04-23 · English

Powers of Governor and High Court in Jharkhand (JH) for JTET Exam 2026 | झारखंड में राज्यपाल और उच्च न्यायालय की शक्तियाँ JTET परीक्षा के लिए

Welcome to Unictest, your ultimate guide for the JTET Exam! In the realm of Indian Polity, understanding the constitutional framework of a state is paramount, especially for competitive exams like JTET. This section delves deep into the 'Powers of Governor and High Court in Jharkhand', a crucial topic for your Social Science/Civics paper. We'll explore their roles, responsibilities, and constitutional provisions, ensuring you grasp every detail for the upcoming 2026 examination.


राज्यपाल की शक्तियाँ (Powers of the Governor in Jharkhand)

The Governor is the constitutional head of the state, acting as a vital link between the Union and the State. Appointed by the President, the Governor performs various functions as per the Indian Constitution. For Jharkhand, these powers are particularly relevant for understanding state governance.

  • कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers):
    राज्यपाल राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। वह राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General), राज्य चुनाव आयुक्त (State Election Commissioner) और राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति भी करते हैं। वे राज्य सरकार के सभी कार्यकारी कार्यों को राज्यपाल के नाम पर किया जाना सुनिश्चित करते हैं।
  • विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers):
    राज्यपाल राज्य विधानमंडल के सत्र को आहूत (summon), सत्रावसान (prorogue) और भंग (dissolve) कर सकते हैं। वे विधेयकों पर अपनी सहमति देते हैं, या उन्हें पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं, या राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रख सकते हैं। अध्यादेश जारी करने की शक्ति (power to promulgate ordinances) भी राज्यपाल के पास है, जब विधानमंडल सत्र में न हो (अनुच्छेद 213)।
  • वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers):
    राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट) राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बिना विधानमंडल में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। धन विधेयक (Money Bill) राज्यपाल की पूर्व सिफारिश के बिना पेश नहीं किया जा सकता। वे राज्य आकस्मिकता निधि (State Contingency Fund) से अग्रिम भुगतान कर सकते हैं।
  • न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers):
    राज्यपाल को राज्य कानून के विरुद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों की सजा को कम करने, निलंबित करने या क्षमा करने की शक्ति होती है (अनुच्छेद 161)। वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति से परामर्श करते हैं।
  • विवेकाधीन शक्तियाँ (Discretionary Powers):
    कुछ मामलों में, राज्यपाल को अपने विवेक से कार्य करने की स्वतंत्रता होती है, जैसे कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिला हो, या राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना।

झारखंड उच्च न्यायालय की शक्तियाँ (Powers of the High Court in Jharkhand)

The Jharkhand High Court, located in Ranchi, is a vital part of the state's judicial system. Established in 2000, it holds significant powers to uphold justice and interpret the constitution.

  • मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction):
    कुछ मामलों में, जैसे चुनाव याचिकाएँ (election petitions), विवाह, कंपनी कानून और मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित मामले सीधे उच्च न्यायालय में दायर किए जा सकते हैं।
  • अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction):
    उच्च न्यायालय दीवानी (civil) और आपराधिक (criminal) दोनों मामलों में अधीनस्थ न्यायालयों (subordinate courts) के निर्णयों के खिलाफ अपील सुनता है। यह इसका सबसे व्यापक क्षेत्राधिकार है।
  • रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction):
    संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत, उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों (fundamental rights) और किसी अन्य कानूनी अधिकार के प्रवर्तन के लिए हेबियस कॉर्पस (Habeas Corpus), मैंडामस (Mandamus), प्रोहिबिशन (Prohibition), सर्टिओरारी (Certiorari) और को-वारंटो (Quo-Warranto) जैसी रिट जारी कर सकता है। यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) की तुलना में व्यापक है।
  • पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार (Supervisory Jurisdiction):
    अनुच्छेद 227 के तहत, उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों (tribunals) पर पर्यवेक्षण की शक्ति रखता है, सिवाय सैन्य न्यायालयों के। यह उनके रिकॉर्ड की मांग कर सकता है और उनके कामकाज को नियंत्रित कर सकता है।
  • न्यायिक समीक्षा की शक्ति (Power of Judicial Review):
    उच्च न्यायालय के पास केंद्र और राज्य दोनों के कानूनों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति है। यदि कोई कानून संविधान का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।
ध्यान दें (Note): JTET परीक्षा में इन शक्तियों से संबंधित सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित अनुच्छेदों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

Important Topics Data

संविधानिक अनुच्छेद (Constitutional Article)विवरण (Description)संबंधित प्राधिकारी (Related Authority)
अनुच्छेद 153राज्यों के राज्यपाल (Governors of States)राज्यपाल
अनुच्छेद 154राज्य की कार्यकारी शक्ति (Executive Power of State)राज्यपाल
अनुच्छेद 161क्षमादान की शक्ति (Power of Pardon)राज्यपाल
अनुच्छेद 213अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Power to Promulgate Ordinances)राज्यपाल
अनुच्छेद 214राज्यों के लिए उच्च न्यायालय (High Courts for States)उच्च न्यायालय
अनुच्छेद 226रिट जारी करने की शक्ति (Power to Issue Writs)उच्च न्यायालय
अनुच्छेद 227सभी न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति (Power of Superintendence over all Courts)उच्च न्यायालय

Detailed Notes

Continuing our exploration, let's delve deeper into the constitutional provisions and the interplay of powers between the Governor and the High Court in Jharkhand, crucial for your JTET preparation. Understanding the nuances of these roles is key to scoring well in the Civics section.


संवैधानिक प्रावधान और राज्यपाल की भूमिका (Constitutional Provisions and Role of the Governor)

The office of the Governor is established under Article 153 of the Indian Constitution. Article 154 states that the executive power of the state shall be vested in the Governor. While the Governor acts on the aid and advice of the Council of Ministers (Article 163), their discretionary powers provide them with a significant role, especially in times of political instability. In Jharkhand, the Governor plays a pivotal role in ensuring constitutional governance, particularly considering its unique tribal demographics and development challenges.

  • अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।
  • अनुच्छेद 154: राज्य की कार्यकारी शक्ति राज्यपाल में निहित होगी।
  • अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
  • अनुच्छेद 161: राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति।
  • अनुच्छेद 200: विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति।
  • अनुच्छेद 213: राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति।

उच्च न्यायालय का महत्त्व और संवैधानिक आधार (Significance and Constitutional Basis of High Court)

The High Court for each state is constituted under Article 214. Article 215 declares every High Court to be a Court of Record. The High Court of Jharkhand, like others, acts as the guardian of the constitution and protector of fundamental rights within its territorial jurisdiction. Its independence from the executive is a cornerstone of India's judicial system.

  • अनुच्छेद 214: राज्यों के लिए उच्च न्यायालय।
  • अनुच्छेद 215: उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना।
  • अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 227: उच्च न्यायालय द्वारा सभी न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति।
  • अनुच्छेद 235: अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण।
तैयारी की रणनीति (Preparation Strategy): JTET Civics के लिए इन अनुच्छेदों को सीधे याद करने के बजाय, उनके पीछे की अवधारणाओं को समझना महत्वपूर्ण है। राज्यपाल और उच्च न्यायालय के बीच शक्तियों के संतुलन और उनकी स्वायत्तता पर ध्यान दें। केस स्टडीज और हाल के फैसलों पर भी नजर रखें जो इन शक्तियों को उजागर करते हैं।

Important Questions & Tips

To excel in the JTET exam, a strategic approach to studying the Powers of Governor and High Court in Jharkhand is essential. This section provides valuable exam tips, focuses on important aspects, and guides you towards effective preparation.


JTET के लिए महत्वपूर्ण तैयारी युक्तियाँ (Important Preparation Tips for JTET)

  • संवैधानिक अनुच्छेदों पर ध्यान दें: राज्यपाल (अनुच्छेद 153-167) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 214-237) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अनुच्छेदों को याद करें और समझें।
  • तुलनात्मक अध्ययन: राज्यपाल की शक्तियों की तुलना राष्ट्रपति की शक्तियों से करें, और उच्च न्यायालय की रिट शक्तियों की तुलना सर्वोच्च न्यायालय की रिट शक्तियों से करें। यह आपको बेहतर समझने में मदद करेगा।
  • झारखंड विशेष: झारखंड के वर्तमान राज्यपाल और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का नाम याद रखें। राज्य से संबंधित किसी विशेष संवैधानिक घटना या निर्णय पर भी ध्यान दें।
  • अभ्यास प्रश्न: पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों (Previous Year Question Papers) से इस खंड से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। Unictest पर आपको कई अभ्यास सेट मिलेंगे।
  • नियमित संशोधन: पढ़ी गई जानकारी को नियमित रूप से संशोधित करें ताकि आप उसे लंबे समय तक याद रख सकें।
चेतावनी (Warning): कई बार छात्र संवैधानिक अनुच्छेदों को रट लेते हैं लेकिन उनके निहितार्थों को नहीं समझते। JTET में conceptual questions भी आ सकते हैं, इसलिए केवल रटने से बचें।

JTET परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तिथियाँ (संभावित)

While specific dates for JTET 2026 are yet to be announced, candidates should always be prepared for the following general timeline:

  • अधिसूचना जारी होना: अक्टूबर - दिसंबर 2025 (संभावित)
  • आवेदन की अंतिम तिथि: दिसंबर 2025 - जनवरी 2026 (संभावित)
  • प्रवेश पत्र जारी होना: परीक्षा से 2-3 सप्ताह पहले
  • परीक्षा की तिथि: मार्च - अप्रैल 2026 (संभावित)
  • परिणाम घोषणा: मई - जून 2026 (संभावित)

Unictest आपको सभी नवीनतम अपडेट्स प्रदान करेगा। अपनी तैयारी जारी रखें!

🎯 Ready to Crack JTET EXAM?

Start with a free mock test — No credit card required

Start Free Mock Test — It's Free!

Frequently Asked Questions (JTET EXAM)

झारखंड के राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करने की शक्ति है। वे राज्य के महाधिवक्ता, राज्य चुनाव आयुक्त और राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की भी नियुक्ति करते हैं। राज्य सरकार के सभी कार्यकारी कार्य उनके नाम पर किए जाते हैं।

झारखंड उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों और किसी अन्य कानूनी अधिकार के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है, जिससे इसका रिट क्षेत्राधिकार व्यापक हो जाता है।

JTET के लिए इन शक्तियों का अध्ययन करने हेतु, संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों को समझें और याद करें। राज्यपाल की शक्तियों को राष्ट्रपति की शक्तियों से और उच्च न्यायालय की रिट शक्तियों को सर्वोच्च न्यायालय की रिट शक्तियों से तुलना करके पढ़ें। झारखंड के विशिष्ट संदर्भों और वर्तमान पदाधिकारियों के नामों पर भी ध्यान दें।

राज्यपाल तब अध्यादेश जारी कर सकता है जब राज्य विधानमंडल सत्र में न हो और राज्यपाल को लगे कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है (अनुच्छेद 213)। इन अध्यादेशों की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो विधानमंडल के अधिनियम का होता है। हालांकि, इन्हें विधानमंडल के पुनः सत्र में आने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए, अन्यथा ये समाप्त हो जाते हैं।

झारखंड उच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा की शक्ति उसे केंद्र और राज्य दोनों के कानूनों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच करने में सक्षम बनाती है। यह शक्ति सुनिश्चित करती है कि कोई भी कानून या सरकारी कार्रवाई संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन न करे, इस प्रकार यह मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है और संवैधानिक सर्वोच्चता को बनाए रखती है। यह लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण है।

JTET EXAM Test Series

500+ Tests | PYQs | Detailed Solutions

Start Now