Discover the Literary Gems of Jharkhand: Chhayavad & Adhunik Kaal | झारखंड के साहित्यिक रत्न: छायावाद एवं आधुनिक काल
Practice QuestionsUnictest Team
Updated: 2026-04-23 · English
हिंदी साहित्य का अध्ययन JTET (Jharkhand Teacher Eligibility Test) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस व्यापक क्षेत्र में, छायावाद और आधुनिक काल का विशेष स्थान है। झारखंड राज्य, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ, इन साहित्यिक कालों में कई प्रतिभाशाली लेखकों का घर रहा है, जिन्होंने अपनी रचनाओं से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। Unictest आपको झारखंड के ऐसे ही प्रमुख लेखकों और उनकी कृतियों से परिचित कराएगा, जो आपकी JTET परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।
छायावाद (लगभग 1918-1936): यह हिंदी साहित्य का वह स्वर्णिम युग है, जहाँ प्रकृति प्रेम, रहस्यवाद, व्यक्तिवादिता और सौंदर्य चेतना प्रमुख रही। इस काल के कवियों ने कल्पना और भावुकता के माध्यम से सूक्ष्म अनुभूतियों को व्यक्त किया। 'प्रसाद', 'पंत', 'निराला' और 'महादेवी वर्मा' इसके चार स्तंभ माने जाते हैं। झारखंड में भी इस काल की अनुगूँज सुनाई दी, जहाँ के लेखकों ने अपनी स्थानीय संवेदनाओं को छायावादी शैली में ढाला।
आधुनिक काल (लगभग 1936 के बाद): छायावाद के उपरांत, हिंदी साहित्य ने आधुनिक काल में प्रवेश किया, जो कई धाराओं में बँटा हुआ है, जैसे प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता, समकालीन कविता आदि। इस काल में सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आम आदमी की समस्याओं को साहित्य का केंद्र बनाया गया। झारखंड के लेखकों ने इस बदलते परिवेश को अपनी रचनाओं में बखूबी उतारा, क्षेत्रीय पहचान और आदिवासी संस्कृति को भी प्रमुखता दी।
झारखंड का साहित्य मूल रूप से इसकी मिट्टी, इसके लोगों और इसकी अद्वितीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है। भले ही मुख्यधारा के छायावादी कवियों में झारखंड से सीधे नाम कम मिलते हों, लेकिन इस काल की भावुकता, प्रकृति प्रेम और रहस्यवाद की झलक यहाँ के कई प्रारंभिक आधुनिक कवियों की रचनाओं में देखी जा सकती है। आधुनिक काल में, झारखंड के लेखकों ने अपनी पहचान बनाई है, विशेषकर क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे खोरठा, नागपुरी, संथाली आदि) के साथ-साथ हिंदी में भी। इन लेखकों ने न केवल अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा दिया, बल्कि राष्ट्रीय फलक पर भी अपनी छाप छोड़ी।
| लेखक (Author) | काल (Period) | प्रमुख रचनाएँ (Major Works) | विशेषता/योगदान (Specialty/Contribution) |
|---|---|---|---|
| राधाकृष्ण | छायावाद/आधुनिक काल | रामलीला, फुटपाथ, रूपांतर, गुलबहार | झारखंड के प्रेमचंद, ग्रामीण व आदिवासी जीवन का यथार्थवादी चित्रण |
| श्रीनिवास पानुरी | आधुनिक काल (खोरठा) | बाल किरण, दिव्य ज्योति, मातृभाषा खोरठा पत्रिका | खोरठा साहित्य के भीष्म पितामह, क्षेत्रीय साहित्य का उत्थान |
| शिवनाथ प्रमाणिक | आधुनिक काल (खोरठा/हिंदी) | दामुदरेक कोराए (खंडकाव्य), तापस बाला | खोरठा के प्रमुख कवि, प्रकृति व संस्कृति का चित्रण |
| डॉ. बी.एन. ओहदार | आधुनिक काल (खोरठा/हिंदी) | खोरठा निबंध, खोरठा लोककथाएँ | खोरठा साहित्य के शोधकर्ता व लेखक, अकादमिक योगदान |
| रामदयाल मुंडा | आधुनिक काल | आदिवासी अस्तित्व और झारखंडी अस्मिता के सवाल (शोध) | पद्मश्री, शिक्षाविद, आदिवासी भाषाओं के संरक्षक |
| वंदना टेटे | समकालीन आधुनिक काल | कोन दिशा में जाबु तइयार (कविता), आदिवासी साहित्य: परंपरा और आधुनिकता | आदिवासी स्त्री विमर्श, समकालीन आदिवासी साहित्य में योगदान |
आधुनिक काल में झारखंड के लेखकों ने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं - कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक और निबंध - में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी रचनाएँ न केवल कलात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे झारखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक यथार्थ को भी दर्शाती हैं।
JTET परीक्षा में झारखंड के साहित्यकारों से संबंधित प्रश्नों का सामना करने के लिए आपको एक व्यवस्थित रणनीति अपनानी होगी।
झारखंड के लेखकों पर आधारित प्रश्न JTET हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग हैं। इन प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए आपको न केवल तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए, बल्कि साहित्यिक प्रवृत्तियों और उनके सामाजिक संदर्भ की भी समझ होनी चाहिए।
इस खंड से JTET में आमतौर पर निम्नलिखित प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं:
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