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Study Notes

CTET vs DSSSB PRT परीक्षा कठिनाई स्तर तुलना (2026)

CTET या DSSSB PRT? जानें कौनसी परीक्षा है कठिन!

Practice Questions
Author

Yadvendra Singh Pal

Founder & Director,Unictest. M.Sc (Maths), MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET, KVS, DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.

Updated: 2026-08-15 · हिंदी

CTET vs DSSSB PRT परीक्षा कठिनाई स्तर तुलना (2026)

CTET और DSSSB PRT परीक्षा, दोनों ही शिक्षकों की भर्ती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन परीक्षाओं की तैयारी करना छात्रों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है। इस लेख में, हम CTET और DSSSB PRT परीक्षा के कठिनाई स्तर की तुलना करेंगे, ताकि आप बेहतर निर्णय ले सकें कि किस परीक्षा की तैयारी कैसे करनी है। मैं आपको व्यक्तिगत अनुभव से बताऊँगा कि किस परीक्षा में क्या खास बातें हैं, जिससे आपको अपनी तैयारी में मदद मिलेगी। यहाँ हम विषयों के आधार पर भी चर्चा करेंगे कि कौन सी परीक्षा किस प्रकार की कठिनाई प्रस्तुत करती है।

CTET परीक्षा का अवलोकन

CTET, यानी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा, हर साल आयोजित की जाती है। यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए है जो प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनना चाहते हैं। CTET का पाठ्यक्रम व्यवहारिक और शैक्षणिक ज्ञान पर केंद्रित है। मैंने देखा है कि CTET में सामान्य ज्ञान, गणित और भाषा जैसे विषयों से प्रश्न अधिक होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में CTET में प्रश्नों की संख्या और कठिनाई स्तर में वृद्धि हुई है, जिससे छात्रों को उचित तैयारी की आवश्यकता है।

CTET में प्रश्नों की संरचना बहुत ही संक्षिप्त और स्पष्ट होती है। प्रश्नों में व्यावहारिक स्थितियों का विश्लेषण करने की क्षमता की जांच की जाती है। उदाहरण के लिए, एक प्रश्न में आपको एक कक्षा की स्थिति दी जाती है और आपको इसके अनुसार निर्णय लेना होता है। छात्रों को यह समझना आवश्यक है कि CTET परीक्षा में पास होने के लिए केवल रट्टा मारना ही काफी नहीं है।

DSSSB PRT परीक्षा का अवलोकन

DSSSB PRT, यानी दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड प्राथमिक शिक्षक परीक्षा, भी शिक्षकों की भर्ती के लिए एक प्रमुख परीक्षा है। DSSSB परीक्षा CTET के मुकाबले थोड़ी अधिक प्रतिस्पर्धात्मक मानी जाती है। इसमें सामान्य ज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी, और शिक्षण विधियों से प्रश्न आते हैं। मैंने अपने छात्रों को इस परीक्षा के लिए गहन विश्लेषण करने की सलाह दी है, क्योंकि इसमें प्रश्न थोड़ा चुनौतीपूर्ण होते हैं।

DSSSB में एक विशेष बात यह है कि यहाँ सामान्य ज्ञान के प्रश्न अक्सर वर्तमान घटनाओं पर आधारित होते हैं। इससे छात्रों को न केवल विषय पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है, बल्कि उन्हें सामयिक घटनाओं की भी अच्छी जानकारी होनी चाहिए। इस परीक्षा की कठिनाई स्तर की तुलना करते हुए मैंने देखा है कि छात्र कई बार DSSSB के प्रश्नों में फंस जाते हैं जहां उनकी तैयारी पूरी नहीं होती है।

  • CTET: सामान्य ज्ञान - 30 प्रश्न
  • DSSSB: सामान्य ज्ञान - 20 प्रश्न
  • CTET: गणित - 30 प्रश्न
  • DSSSB: गणित - 25 प्रश्न
  • CTET: भाषा - 40 प्रश्न
  • DSSSB: भाषा - 30 प्रश्न

CTET और DSSSB परीक्षा की कठिनाई का मूल्यांकन

दोनों परीक्षाओं में कठिनाई का स्तर अलग-अलग है। CTET में, प्रश्न सरल और सीधे होते हैं, लेकिन DSSSB में आपको अधिक विश्लेषणात्मक सोच की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, मैंने देखा है कि DSSSB में प्रश्न अधिक मात्रा में होते हैं और हर विषय में गहराई से पूछे जाते हैं। इसलिए, DSSSB की तैयारी करते समय आपको प्रत्येक विषय का गहन अध्ययन करना होता है।

CTET में, आप प्रश्नों को हल करने के लिए त्वरित उत्तर देकर अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं, जबकि DSSSB में आपको प्रत्येक प्रश्न का समाधान करने के लिए समय निकालना पड़ता है। यह सभी छात्रों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण है। मैंने अपने छात्रों को सलाह दी है कि DSSSB की तैयारी में उन्हें अधिक समय देना चाहिए।

एक महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखें कि DSSSB की तैयारी में समय प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। छात्रों को समय का सही उपयोग करना होगा।

परीक्षा पैटर्न की तुलना

CTET और DSSSB के परीक्षा पैटर्न में भी अंतर हैं। CTET में प्रश्न वस्तुनिष्ठ (MCQ) होते हैं, जबकि DSSSB में भी वस्तुनिष्ठ प्रश्न होते हैं लेकिन उनके साथ-साथ कुछ अन्य प्रकार के प्रश्न भी होते हैं। उदाहरण के लिए, DSSSB में आपको अध्ययन की विधियों पर आधारित केस स्टडी का प्रश्न भी मिल सकता है। मैंने देखा है कि छात्र अक्सर DSSSB के केस स्टडी प्रश्नों को हल करने में संघर्ष करते हैं।

CTET में प्रत्येक प्रश्न का सही उत्तर 1 अंक का होता है, जबकि DSSSB में भी इसी प्रकार का अंकन होता है। लेकिन DSSSB में गलत उत्तर देने पर नकारात्मक अंकन भी होता है, जो छात्रों के लिए चिंता का विषय होता है। इसलिए, DSSSB की तैयारी करते समय, इसे ध्यान में रखना आवश्यक है।

कठिनाई स्तर का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

कई छात्रों को परीक्षा की कठिनाई स्तर से तनाव होता है। CTET में, प्रश्न आसान होते हैं, जिससे छात्रों को आत्मविश्वास मिलता है। DSSSB की कठिनाई स्तर के कारण छात्रों में चिंता बढ़ सकती है, जिससे वे कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी भूल सकते हैं। मैंने देखा है कि कई छात्र DSSSB में उत्तीर्ण होने के लिए अत्यधिक तनाव में रहते हैं।

मनोवैज्ञानिक रूप से, CTET की तैयारी में छात्रों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, क्योंकि प्रश्नों का हल करना उनके लिए आसान होता है। वही DSSSB में कठिनाई स्तर के कारण कई बार छात्र निराश हो जाते हैं। इसलिए, मैं हमेशा अपने छात्रों को सलाह देता हूँ कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और नियमित रूप से अभ्यास करें।

एक और महत्वपूर्ण बात है कि यदि आप CTET को अच्छे से कर लेते हैं, तो DSSSB की तैयारी में बहुत मदद मिलेगी।

तैयारी के लिए सुझाव

CTET और DSSSB की परीक्षा के लिए रणनीतियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। CTET के लिए मैं हमेशा अपने छात्रों को एक ठोस अध्ययन योजना बनाने की सलाह देता हूँ। उदाहरण के लिए, यदि आप एक विषय पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो उसका सही अभ्यास करें। DSSSB के लिए, मेरा सुझाव है कि एक विस्तृत पाठ्यक्रम की योजना बनाएं और उसमें समयबद्ध तरीके से सभी विषयों को कवर करें। मैंने अपने छात्रों को पिछले वर्ष के प्रश्नपत्र हल करने की सलाह दी है, जो उन्हें उनकी तैयारी को मजबूत करने में मदद करता है।

एक और सुझाव यह है कि आप समूह अध्ययन करें। इससे आपको विभिन्न दृष्टिकोण और समाधान मिलेंगे। अगर आप परीक्षा को मुश्किल मानते हैं, तो आपको किसी शिक्षण संस्थान में नामांकन करने पर विचार करना चाहिए। इस तरह से, आप मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

अंतिम विचार

आखिरकार, CTET और DSSSB दोनों ही परीक्षाएँ महत्वपूर्ण हैं। हालाँकि, दोनों की तैयारी करने के तरीके में अंतर है। CTET आसान है, जबकि DSSSB अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छात्रों को अपनी क्षमताओं के अनुसार अपनी पसंद बनानी चाहिए और अपनी तैयारी में समर्पण दिखाना चाहिए। अगर आप ये पाठ याद रखते हैं, तो आप सफलता की सीढ़ी पर चढ़ सकते हैं।

याद रखें, सफलता मेहनत करने वालों को ही मिलती है। अगर आप CTET या DSSSB के लिए मेहनत कर रहे हैं, तो एक सकारात्मक मानसिकता बनाए रखें।

Important Topics Data

परीक्षाविषयकठिनाई स्तरप्रश्नों की संख्याअन्य विशेषताएँ
CTETगणितमध्यम30व्यावहारिक प्रश्न
CTETगैर-वर्णात्मकआसान40व्यापक कवरेज
DSSSBगणितकठिन25विश्लेषणात्मक प्रश्न
DSSSBभाषामध्यम30समाचार आधारित प्रश्न
DSSSBसामान्य ज्ञानकठिन20आधुनिक घटनाएँ

Detailed Notes

तैयारी का संपूर्ण रणनीति अवलोकन

CTET और DSSSB दोनों की तैयारी के लिए एक ठोस रणनीति बनाना आवश्यक है। सबसे पहले, आपको अपनी उपलब्ध समय सीमा का आकलन करना होगा और उसके अनुसार योजना बनानी होगी। दोनों परीक्षाएँ विभिन्न विषयों पर आधारित हैं, इसलिए आपको विषयों को प्राथमिकता देकर तैयारी करनी होगी। मेरे अनुभव में, एक मजबूत प्रारंभिक आधार बनाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए, NCERT की पुस्तकें आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेंगी।

CTET के लिए, मैंने देखा है कि टॉपिक वाइज अभ्यास करने से छात्रों को बहुत लाभ होता है। जबकि DSSSB में, आपको प्रत्येक विषय में गहराई से जाना होगा। इससे आपको परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद मिलेगी। मेरा सुझाव है कि प्रश्न बैंक का उपयोग करें, जो पिछले वर्षों के प्रश्नों का संग्रह है।

Expert Tip: कोई भी तैयारी योजना एक साधारण तरीके से सुसंगत होनी चाहिए, जिसमें प्रतिदिन का अध्ययन कम से कम 4-5 घंटे शामिल हो।

महिने दर महिने अध्ययन योजना

आपकी तैयारी का एक महीने-दर-महीने एक योजना बनाना आवश्यक है। पहले महीने में, तैयारी की नींव रखें। पाठ्यक्रम का एक अंतराल समय निर्धारित करें और इसे पूरा करें। मुझे लगता है कि पहले महीने में सामान्य ज्ञान और गणित के कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करना सबसे अच्छा होता है। अगला महीना भाषा विषय पर ध्यान देने के लिए समर्पित करें।

तीसरे और चौथे महीने में, DSSSB के लिए गहन अध्ययन करें। मेरे छात्रों ने पाया है कि शैक्षणिक योजनाओं एवं शिक्षण विधियों का अध्ययन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगले दो महीने में, पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र हल करें। इससे आपको प्रस्तावित विषयों पर बेहतर पकड़ प्राप्त होगी।

विषय वार टूटने के साथ अंक भारन

जब हम CTET और DSSSB के विषयवार टूटने की बात करते हैं, तो दोनों परीक्षाओं के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। CTET में गणित, भाषा और सामान्य ज्ञान के विषय महत्वपूर्ण होते हैं। DSSSB में, आपको प्रत्येक विषय में अधिक गहराई से जाना होगा। पिछले कुछ वर्षों में, मैंने देखा है कि सभी विषयों का तालमेल बहुत महत्वपूर्ण है।

आंकड़ों के अनुसार, CTET में गणित से 30 अंक, भाषा से 40 अंक और सामान्य ज्ञान से 30 अंक मिलते हैं। DSSSB में, यह गणित में 25 अंक, भाषा में 30 अंक और सामान्य ज्ञान में 20 अंक होता है। इसलिए, विद्यार्थियों को इन अंकों को ध्यान में रखते हुए तैयारी की रणनीति बनानी चाहिए।

  • CTET गणित: 30 अंक
  • CTET भाषा: 40 अंक
  • CTET सामान्य ज्ञान: 30 अंक
  • DSSSB गणित: 25 अंक
  • DSSSB भाषा: 30 अंक
  • DSSSB सामान्य ज्ञान: 20 अंक

सर्वश्रेष्ठ किताबें

CTET और DSSSB दोनों की तैयारी के लिए कुछ सर्वश्रेष्ठ किताबें हैं। CTET के लिए, NCERT की पाठ्यपुस्तकों के अलावा, 'CTET के लिए सरला गुप्ता' और 'CTET की संपूर्ण तैयारी' बहुत फायदेमंद होती हैं। वहीं DSSSB की तैयारी के लिए, 'DSSSB PRT के लिए मनीषा वर्मा' और 'DSSSB की तैयारी के लिए मयूर पब्लिकेशन' उपयुक्त हैं।

हर किताब का चयन करते समय यह ध्यान रखें कि वह किताब आपको अपने पाठ्यक्रम को समझाने में मदद करे और आपके ज्ञान को बढ़ाए। मैंने व्यक्तिगत रूप से सभी छात्रों को यह सलाह दी है कि वे किताबों का चयन करते समय उनके प्रकाशक और समीक्षाओं पर ध्यान दें।

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि हर किताब आपको अध्ययन करने के लिए प्रेरित करें, न कि आपको भ्रमित।

कोचिंग बनाम आत्म-अध्ययन

यहाँ पर एक महत्वपूर्ण सवाल आता है कि क्या कोचिंग लेना चाहिए या आत्म-अध्ययन करना चाहिए। वर्षों में मैंने देखा है कि कोचिंग संस्थान सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, लेकिन आत्म-अध्ययन भी लोगों के लिए अत्यधिक प्रभावी हो सकता है। यदि आप अनुशासित हैं और समय प्रबंधन की कला जानते हैं, तो आत्म-अध्ययन सही विकल्प है।

कोचिंग में आपको समय-सीमा में सीखने का अवसर मिलता है और अनुभवी शिक्षक से मार्गदर्शन भी। लेकिन इसके साथ-साथ, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपनी खुद की स्वाध्याय विधि विकसित करें। कई छात्र आत्म-अध्ययन के माध्यम से भी शीर्ष स्थान प्राप्त कर चुके हैं।

Expert Tip: अगर आप कोचिंग ले रहे हैं, तो कभी-कभी अपने शिक्षक से भी प्रश्न पूछें। इससे आप स्पष्टीकरण प्राप्त करेंगे।

समय प्रबंधन और दैनिक अनुसूची

समय प्रबंधन दोनों परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण होता है। छात्रों को अपनी दैनंदिन गतिविधियों का संतुलन बनाने की आवश्यकता होती है। मेरे अनुभव में, मैंने देखा है कि जो छात्र समय का बेहतर प्रबंधन करते हैं, वे संतुलित अध्ययन करके अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त करते हैं।

आपकी दैनिक अनुसूची में अध्ययन के समय को प्राथमिकता दें। उदाहरण के लिए, सुबह के समय का अध्ययन सबसे प्रभावी हो सकता है। दिन के समय थोड़ी देर आराम करें, और शाम को पुनः पढ़ाई करें। समय-सीमा के भीतर कठिनाई स्तर के अनुसार प्रश्न हल करने का प्रयास करें। इससे आपको मानसिक रूप से तैयार रहने में मदद मिलेगी।

आखिरी 30 दिनों के लिए पुनरावलोकन रणनीति

परीक्षा से 30 दिन पहले, आपको अपनी तैयारी का एक अंतिम रिव्यू करना चाहिए। इस समय आपको अति महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का पुनरावलोकन करें और उन्हें हल करने का प्रयास करें। मैंने पाया है कि पिछले प्रश्न पत्रों का अध्ययन करने से प्रश्नों की संरचना और कठिनाई को समझने में मदद मिलती है।

हर दिन रिवीजन करते समय, अपने नोट्स का उपयोग करें और महत्वपूर्ण सूत्रों और अवधारणाओं को संक्षेप में लिखें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आप परीक्षा के समय पर सब कुछ याद कर सकें।

Important Questions & Tips

परीक्षा के दिन की चेकलिस्ट

परीक्षा के दिन, उम्मीदवारों के लिए तैयारी करना बहुत महत्वपूर्ण है। आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके पास सभी आवश्यक चीजें हैं, जैसे कि एडमिट कार्ड, पहचान पत्र, और पेंसिल-कलम। मैंने देखा है कि कई छात्र परीक्षा में तैयार नहीं आते, जिससे उनकी तैयारी पर असर पड़ता है।

आपको अपने खाने का ध्यान भी रखना चाहिए। हल्का नाश्ता करें जो ऊर्जा प्रदान करे। किसी भी तनाव से बचें और सुनिश्चित करें कि आप अच्छी नींद लें। परीक्षा के दिन खुद को शांत रखें और सकारात्मकता को बनाए रखें।

छात्रों द्वारा की जाने वाली 10 सामान्य गलतियाँ

1) अंतिम समय में रिवीजन न करना - इससे बहुत से छात्र अंकों की हानि करते हैं।
2) केवल रट्टा मारना - कई छात्र इस आदत के कारण वास्तविक परीक्षा में असफल होते हैं।
3) समय का प्रबंधन न करना - समय को सही तरीके से न प्रबंधित करने से प्रश्नों को हल करने का समय नहीं मिलता।
4) भ्रमित होना - कई छात्र पेपर में प्रश्नों को देखकर घबरा जाते हैं।
5) अनजान गणितीय सूत्र - बिना समझे सूत्रों को याद करना।
6) आत्म-विश्लेषण न करना - खुद की कमजोरियों को जानना जरूरी है।
7) सहायक सामग्री पर निर्भर रहना - केवल पुस्तकें ना पढ़ें, बल्कि डिजिटल संसाधनों का भी उपयोग करें।
8) विषयों का अनदेखा करना - सभी विषयों पर ध्यान देना आवश्यक है।
9) निरंतरता बनाए रखना - छोटे लक्ष्य बनाना और उन पर ध्यान केंद्रित करना।
10) नकारात्मकता का सामना करना - सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।

आखिरी 7 दिनों का रिवीजन योजना

आखिरी 7 दिनों में, सब कुछ याद करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए, एक सटीक योजना बनानी होगी। पहले दिन, एकाग्रता के साथ महत्वपूर्ण विषयों का पुनरावलोकन करें। दूसरे दिन, पिछले वर्षों के साधारण प्रश्न हल करें। तीसरे दिन, कठिन प्रश्नों पर ध्यान दें। चौथे दिन, सभी विषयों का कवर करें। पांचवे दिन, परीक्षा के पहले आत्म-मूल्यांकन करें। छठे और सातवें दिन, मन को शांत करने पर ध्यान दें।

अपेक्षित कट-ऑफ और पिछले वर्ष की तुलना डेटा

कट-ऑफ हर वर्ष भिन्न हो सकती है, इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए हमें अपनी तैयारी करनी चाहिए। पिछले वर्ष CTET की कट-ऑफ 80 अंक थी, जबकि DSSSB की कट-ऑफ 70 अंक थी। ये आंकड़े हमें यह बताते हैं कि तैयारी के स्तर को ध्यान में रखते हुए हमें अपनी रणनीति बनानी चाहिए।

कैरियर की संभावनाएँ, वेतन और पदोन्नतियाँ

CTET और DSSSB दोनों ही परीक्षाएँ छोटी अवधि में अच्छे करियर की संभावनाएँ प्रदान करती हैं। एक बार परीक्षा पास करने के बाद, आपको प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक के रूप में काम करने का अवसर मिलता है। मैंने देखा है कि CTET के बाद, शिक्षकों को 35,000 से 45,000 रुपये तक का वेतन मिलता है। DSSSB के पास भी इसी प्रकार की संभावनाएँ हैं, लेकिन यहाँ आपको अलग-अलग स्कूलों में काम करने का मौका मिलता है।

सफल छात्रों की प्रेरणादायक कहानियाँ

टॉपर विश्वास ने बताया कि उन्होंने केवल NCERT से अध्ययन किया और उन्होंने समय प्रबंधन का सही इस्तेमाल किया। दूसरी टॉपर साक्षी ने कहा कि उन्होंने प्रत्येक विषय के लिए अलग-अलग नोट्स बनाए और नियमित रिवीजन किया। ये प्रेरणादायक उदाहरण छात्रों को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन करते हैं।

गलतियों से बचने के लिए, परीक्षा के दौरान आत्म-प्रबंधन पर ध्यान दें। भरोसा रखें, आपकी मेहनत रंग लाएगी!

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Frequently Asked Questions (CTET PRIMARY)

CTET की परीक्षा मुख्यतः शैक्षणिक ज्ञान पर आधारित होती है जबकि DSSSB PRT में गहन विश्लेषणात्मक प्रश्न होते हैं। CTET की परीक्षा में प्रश्न सरल और सीधे होते हैं, जबकि DSSSB में अधिक चुनौतीपूर्ण प्रश्न होते हैं। DSSSB में आपको नकारात्मक अंकन का भी सामना करना पड़ता है। इसलिए, दोनों परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग-अलग रणनीतियों की आवश्यकता होती है।

CTET और DSSSB की तैयारी के लिए एक ठोस अध्ययन योजना बनाना अनिवार्य है। CTET के लिए NCERT की किताबें मदद कर सकती हैं, जबकि DSSSB के लिए विशेष कोचिंग या ऑनलाइन संसाधनों से लाभ उठाना चाहिए। दोनों परीक्षाओं में समय प्रबंधन, नियमित रिवीजन और विषयों का गहन अध्ययन करना जरूरी है। मैंने अपने छात्रों को सुझाया है कि वे पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का समाधान करें।

CTET को आमतौर पर आसान माना जाता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार से तैयारी कर रहे हैं। यदि आपने अच्छे से पढ़ाई की है और विषयों को समझा है, तो आपको पेपर हल करने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए। लेकिन इसके लिए नियमित अभ्यास और रिवीजन करना आवश्यक है।

DSSSB PRT परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न शामिल होते हैं, जिसमें सामान्य ज्ञान, गणित, भाषा और शिक्षण विधियाँ होती हैं। परीक्षा में नकारात्मक अंकन भी है, जिससे गलत उत्तर देने पर अंक कटते हैं। DSSSB में केस स्टडी प्रश्न भी होते हैं, जो छात्रों को सोचने पर मजबूर करते हैं। यह परीक्षा छात्रों को विभिन्न विषयों की गहराई में जाने की चुनौती देती है।

CTET और DSSSB दोनों परीक्षाओं को पास करने के बाद, उम्मीदवार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक के रूप में कार्य कर सकते हैं। CTET के बाद शिक्षकों को 35,000 से 45,000 रुपये तक का वेतन मिल सकता है जबकि DSSSB के अंतर्गत भी इसी तरह की संभावनाएँ हैं। DSSSB में कुछ मामलों में उन्नति और पदोन्नति के अवसर बेहतर हो सकते हैं।

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